

Khunari Village: ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से पालांदुर क्षेत्र के खुनारी गांव में एक अनोखे बाहुला-बाहुली विवाह समारोह का आयोजन किया गया। बचपन के लोकप्रिय भातुकली खेल की परंपरा को सहेजने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीणों की पुरानी यादों को फिर से ताजा कर दिया। गांव के लोगों ने इस आयोजन को वास्तविक विवाह समारोह की तरह भव्य रूप दिया।
विवाह की पत्रिका छपवाई गई, मंडप पूजन और हल्दी समारोह आयोजित किया गया तथा बैंडबाजे के साथ पूरे उत्साह से विवाह संपन्न कराया गया। यह समारोह प्रभु सेलोकर के निवास स्थान पर शुभ मुहूर्त में आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों ने दूल्हा और दुल्हन पक्ष की भूमिका निभाते हुए पूरे उत्साह से भाग लिया।
कार्यक्रम के लिए पूरे गांव ने एकजुट होकर तैयारियां कीं। विवाह समारोह के दौरान पूरे गांव के लोग सामूहिक भोज में शामिल हुए, जिससे सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश भी मजबूत हुआ। आयोजन की जिम्मेदारी धनराज सेलोकर, रोशन निंबार्ते और तामेश्वर सेलोकर ने संभाली, जबकि गांव की महिला मंडली ने भी बढ़चढ़कर सहयोग किया।
लोक परंपराओं व संस्कृति से जुड़ने का अवसर ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों और गुरूजनों ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में पारंपरिक मूल्यों और आपसी अपनत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की सफलता के लिए कल्पना सेलोकर, वैशाली सेलोकर, अश्विनी सेलोकर, मंगला सेलोकर, उमा सेलोकर, वर्षा भुते, वनिता खराबे सहित अनेक ग्रामीणों ने विशेष योगदान दिया। खुनारी गांव का यह बाहुलाबाहुली विवाह समारोह केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर लोगों के बीच लंबे समय तक याद रखा जाएगा।