कचारगढ़ तीर्थक्षेत्र की उपेक्षा पर उठे सवाल, 10 वर्षों से नहीं मिली विकास निधि

Kachargarh Devsthan:  गोंदिया जिले के सालेकसा स्थित कचारगढ़ देवस्थान, जो देशभर के आदिवासी समाज का प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है, पिछले एक दशक से विकास निधि के अभाव का सामना कर रहा है।
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Kachargarh (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Kachargarh Pilgrimage Site: जिले के सालेकसा तहसील स्थित कचारगढ़ देवस्थान देशभर के आदिवासी समाज का राष्ट्रीय स्तर का धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिवर्ष देश के 1516 राज्यों से लगभग 10 से 12 लाख श्रद्धालु तथा विदेशों से शोधकर्ता और अध्येता दर्शन व अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। महाराष्ट्र शासन के ग्राम विकास विभाग ने वर्ष 2016 में कचारगढ़ देवस्थान को ब वर्ग तीर्थक्षेत्र का दर्जा प्रदान किया था।

इसके अंतर्गत भक्त निवास, संग्रहालय म्यूजियम, वाचनालय, सांस्कृतिक भवन, अनुसंधान केंद्र, शौचालय व स्नानगृह निर्माण के लिए पहले 22 करोड़ रु. तथा बाद में 21 करोड़ रु. के विकास प्रस्ताव जिलाधीश गोंदिया द्वारा मंत्रालय को भेजे गए, लेकिन आज तक इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।

कचारगढ़ तीर्थक्षेत्र विकास से वंचित

नियमों के अनुसार ब वर्ग तीर्थक्षेत्र को प्रतिवर्ष 2 करोड़ रु. विकास निधि मिलनी चाहिए थी। इस हिसाब से पिछले 10 वर्षों में लगभग 20 करोड़ रु.की राशि स्वीकृत होना अपेक्षित था, लेकिन एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ। वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री व आदिवासी विकास मंत्री ने कचारगढ़ दौरे के दौरान 100 करोड़ रु.की विकास निधि तथा देवस्थान को अ वर्ग तीर्थक्षेत्र का दर्जा देने की घोषणा की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में जिलाधीश गोंदिया ने अ वर्ग दर्जे का प्रस्ताव भी शासन को भेजा, लेकिन आज तक न तो दर्जा मिला और न ही विकास के लिए कोई निधि स्वीकृत हुई।

10 लाख श्रद्धालु आते हैं

28 करोड़ के प्रस्ताव के बदले मिला आश्वासनआदिवासी विकास विभाग को 28 करोड़ रु। के प्रस्ताव भी समयसमय पर भेजे गए, लेकिन हर वर्ष केवल आश्वासन ही मिलता रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कचारगढ़ देवस्थान समिति के पुनरुत्थान के लिए 100 करोड़ रु. की राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन 8 साल से यह घोषणा हवा हवाई हो गई है। जिससे आदिवासी समाज अब सवाल उठा रहा है कि क्या इस विधानसभा अधिवेशन में कचारगढ़ देवस्थान के विकास के लिए ठोस निर्णय लिया जाएगा या फिर एक बार फिर केवल टाटाबायबाय कर दिया जाएगा

निधि के अभाव में अनेक प्रस्ताव लंबित

कचारगढ़ तीर्थक्षेत्र समिति धनेगांव अध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कोकोड़े ने कहा कि कचारगढ़ देवस्थान के विकास के लिए सरकार से निधि की मांग प्रतिवर्ष की जाती है। लेकिन अब तक निधि नहीं मिल पाई है। सिर्फ सरकार की ओर से हर वर्ष आश्वासन ही मिल रहा है। निधि के अभाव में अनेक प्रस्ताव लंबित है, जिसके कारण यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।

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