इटियाडोह बांध बना गोंदिया-भंडारा-गड़चिरोली की जीवनधारा, जल पूजन कर मनाया गया पानी पर्व

Gondia News: गोंदिया के इटियाडोह बांध के ओवरफ्लो होने पर प्रशासन द्वारा जल पूजन की परंपरा निभाई जाती है। 2019 से लगातार भर रहा यह बांध सिंचाई और कृषि के लिए वरदान साबित हो रहा है।
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गोंदिया का इटियाडोह बांध (फोटो नवभारत)
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Itiadoh Dam Overflow: गोंदिया के इटियाडोह बांध के ओवरफ्लो होने पर स्थानीय प्रशासन द्वारा आधिकारिक जल पूजन करने की परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। बांध के पूरी तरह भर जाने और ओवरफ्लो होने पर तहसीलदार, विधायक या जिलाधीश द्वारा औपचारिक जल पूजन किया जाता है। 2019 से इटियाडोह बांध लगातार ओवरफ्लो हो रहा है, जबकि जल पूजन के पीछे कुछ कारण बताए जाते हैं।

इटियाडोह बांध का ओवरफ्लो होना गोंदिया, भंडारा, गड़चिरोली जिलों के किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बांध में पर्याप्त भंडारण होने के कारण, जिलों में कृषि को सिंचाई के लिए प्रचुर मात्रा में पानी मिलता है।

बांध के ओवरफ्लो होने पर, जल पूजन को जल देवता के प्रति कृतज्ञता के रूप में माना जाता है और प्रार्थना की जाती है कि आने वाले वर्ष में भरपूर बारिश हो और किसान सुखी और समृद्ध रहें। यह एक औपचारिक समारोह है जो स्वागत, कृतज्ञता और पर्यावरण मित्रता को दर्शाता है।

गोंदिया के इटियाडोह बांध का ओवरफ्लो होना जिले के जल संसाधनों के लिए एक शुभ संकेत है। इसलिए प्रशासन और ग्रामीण जल पूजा करके इस खुशी का जश्न मनाते हैं। इससे ग्रामीणों को संभावित बाढ़ की पूर्व चेतावनी भी मिल जाती है। गणमान्य लोग सार्वजनिक रूप से जल पूजा करते हैं और जनता को सावधान रहने की हिदायत देते हैं।

जल पूजा कैसे की जाती है?

इटियाडोह बांध के ओवरफ्लो होने के बाद, संबंधित तहसीलदार, विधायक या जिलाधीश और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में जल पूजा की जाती है। जल देवता की मूर्ति स्थापित करना, नारियल फोड़ना, जल की पूजा करना और किसानों की समृद्धि के लिए प्रार्थना करना जैसे धार्मिक और औपचारिक कार्य किए जाते हैं। ग्रामीण, किसान और पर्यटक भी बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होते हैं और इस नजारे का आनंद लेते हैं।

प्राचीन काल से चल रही परंपरा

भारतीय उपमहाद्वीप में जल पूजा की प्रथा अत्यंत प्राचीन काल से, अर्थात् वैदिक काल से ही प्रचलित रही है। वैदिक काल में जल देवताओं (जैसे वरुण, इंद्र) की पूजा की जाती थी। इसके अलावा, हड़प्पा-मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन संस्कृतियों में भी जलाशयों और जल पूजा का उल्लेख मिलता है।

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