गोंदिया में मानसून की देरी का असर, सब्जियों की कीमतों में उछाल, उपभोक्ताओं का बिगड़ा बजट

Vegetable Prices: मानसून में देरी के कारण गोंदिया में सब्जियों का उत्पादन घट गया है। मंडियों में आवक कम होने से कीमतों में तेजी आई है, जिससे किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
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Vegetable Prices Rise Due To Delayed Monsoon:गोंदिया जिले में इस वर्ष मानसून के आगमन में हुई देरी का सीधा असर सब्जी उत्पादन पर दिखाई देने लगा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है। उत्पादन घटने से स्थानीय सब्जी मंडियों में आवक काफी कम हो गई है। परिणामस्वरूप, सामान्यतः बारिश के मौसम में बढ़ने वाले सब्जियों के दाम इस बार मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही बढ़ गए हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों और किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

पानी की कमी से सूख गईं सब्जियों की फसलें

किसानों ने गर्मी के बाद समय पर बारिश होने की उम्मीद में विभिन्न प्रकार की सब्जी फसलों की खेती की थी। लेकिन कई क्षेत्रों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने और पानी की कमी के कारण सब्जियों के पौधे सूख गए। इससे उत्पादन में भारी कमी आई और बाजार में सब्जियों की आपूर्ति घट गई। आपूर्ति कम होने और मांग लगातार बनी रहने के कारण खुदरा बाजार में कई सब्जियों के दाम पिछले कुछ सप्ताहों की तुलना में 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसान कुओं और बोरवेल के पानी से सब्जियों की फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि बढ़ते तापमान और लगातार बारिश नहीं होने से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण सभी फसलों को बचा पाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे नुकसान की आशंका लगातार बढ़ रही है।

महंगी सब्जियों से बिगड़ा घरेलू बजट

सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। गृहिणियों को रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि रोजमर्रा में उपयोग होने वाली अधिकांश सब्जियां महंगी हो गई हैं। बाजार में टमाटर, पालक, मिर्च, हरा धनिया, फूलगोभी, बैंगन सहित कई सब्जियों के दाम बढ़ने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों से आने वाली सब्जियों की मात्रा विभिन्न कारणों से कम हो गई है। इसके चलते मंडियों में आवक घट गई है और कीमतों में तेजी बनी हुई है। यदि मानसून के शुरुआती दौर में अचानक अधिक बारिश होती है तो खेतों में लगी सब्जियों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे महंगाई का असर और अधिक बढ़ सकता है।

थोक बाजार में भी कम है उपलब्धता

थोक बाजार में भी सब्जियों की उपलब्धता सामान्य से कम बनी हुई है, जबकि मांग लगातार अधिक है। इसी कारण थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सब्जी विक्रेता मंदा डोकरीमारे के अनुसार, थोक बाजार में महंगे दाम पर सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को भी महंगी दरों पर सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं।

सब्जियों के वर्तमान भाव प्रतिकिलो में

सब्जी भाव (₹/किलो)
पालक 50
भिंडी 30
चवलाई (फली) 40
ढेमसा 40
टमाटर 40
फूलगोभी 40
बैंगन 40
मिर्च 50
ककड़ी 40
पत्तागोभी 30
मटर 60
हरा धनिया 60
शिमला मिर्च 50
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