गोंदिया में रबी धान का क्षेत्र घटने की आशंका, कम बारिश और जल आरक्षण से किसानों की चिंता बढ़ी

Gondia Paddy Farming: गोंदिया में कम बारिश और कीट-रोगों के कारण खरीफ धान उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। सिंचाई परियोजनाओं के जल आरक्षण से रबी धान का रकबा घट सकता है।
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गोंदिया धान की खेती(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gondia Agriculture Department: गोंदिया जिले में खरीफ और रबी दोनों मौसम में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। खरीफ में करीब 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर, जबकि रबी में 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। खरीफ में फसल को नुकसान होने पर किसान उसकी भरपाई रबी सीजन में धान की खेती के जरिए करने की योजना बनाते हैं। लेकिन इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के चलते बारिश कम हुई।

साथ ही कीट-रोगों के प्रकोप से खरीफ धान के उत्पादन में गिरावट की आशंका है। दूसरी ओर, बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के पानी का कुछ हिस्सा वर्ष 2027 तक पेयजल के लिए आरक्षित रखने के शासन के निर्देश हैं। ऐसे में इस वर्ष जिले में रबी का रकबा घटने की संभावना जताई जा रही है। इन फसलों का रकबा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ऐसी जानकारी जिला कृषि अधीक्षक निलेश कानवडे ने दी।

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सिंचाई परियोजनाओं में पर्याप्त पानी

सिंचाई परियोजनाओं में फिलहाल औसतन 85 प्रश से अधिक जलसंग्रह उपलब्ध है। संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए शासन ने सिंचाई परियोजनाओं के कुछ जलसंग्रह को वर्ष 2027 तक आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में रबी सीजन के लिए किसानों को सिंचाई परियोजनाओं से कितना पानी उपलब्ध होगा, इसे लेकर संदेह बना हुआ है। इसी कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय में गंभीरता से ध्यान दे।

75,000 हेक्टे. क्षेत्र वर्षा पर निर्भर

जिले में कुल 2 लाख 7 हजार हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र है। इसमें उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं के माध्यम से करीब 1 लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है, जबकि शेष करीब 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र वर्षों पर निर्भर है। इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण जिले में औसत से करीब 7 प्रश कम बारिश हुई। बारिश में लंबे अंतराल के कारण खरीफ धान की फसल भी प्रभावित हुई। इसके अलावा कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ने से कई किसानों के हाथ में आई फसल बर्बाद होने की स्थिति बनी।

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मक्का 15 हजार, सरसों 3 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य

गोंदिया जिला कृषि अधीक्षक निलेश कानवडे ने बताया कि जिले में इस वर्ष बारिश का प्रमाण कम रहा है। इसलिए किसानों को धान की खेती के बजाय मक्का और सरसों की खेती की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। रबी सीजन में मक्का का रकबा 15 हजार हेक्टेयर और सरसों का रकबा 3 हजार हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इन फसलों के लिए धान की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होगी और उत्पादन भी बेहतर मिलने की उम्मीद है।

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