गोंदिया: धान खरीदी का 'टारगेट' बना किसानों के लिए पहेली, 56 हजार किसान अब भी इंतजार में

Gondia Farmer News:गोंदिया जिले में धान खरीदी का लक्ष्य बार-बार बढ़ाने के बावजूद 40% पंजीकृत किसानों से अब तक धान नहीं खरीदा गया। केंद्र ने लक्ष्य तय नहीं किया, फिर राज्य सरकार लक्ष्य क्यों दे रही है?
Gondia's paddy procurement target faces criticism. Despite no central limit, state caps leave 56k farmers waiting. With 25.92L quintals reached, farmers await a new target to sell their crops.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Maharashtra Farmer Issues: गोंदिया किसानों को समर्थन मूल्य से कम कीमत न मिले, इसके लिए सरकार जिला मार्केटिंग फेडरेशन और आदिवासी विकास महांडल के जरिए धान खरीदती है। सरकार इन दोनों एजेंसियों को खरीफ और रबी सीजन में धान खरीदने का लक्ष्य देती है। लेकिन, सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदना जरूरी है।

तो, यह तो पता ही है कि केंद्र सरकार धान खरीदने का कोई लक्ष्य तय नहीं करती। तो, सवाल यह उठता है कि राज्य सरकार खरीदी का लक्ष्य क्यों तय न करती है। खरीफ सीजन 2025-26 में गोंदिया जिले में धान की फसल की औसत उत्पादकता 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, और इस हिसाब से जिले के सभी पंजीकृत किसानों का उगाया हुआ धान खरीदी केंद्र पर खरीदा जाना चाहिए, न जिले के 1 लाख 32 हजार 614 किसानों ने धान बेचने के लिए ऑनलाइन

पंजीकरण कराया है। पंजीकृत किसानों में से 40 प्रश। किसानों से अभी भी धान खरीदा जाना बाकी है। केंद्र सरकार ने खरीदी केंद्रों को किसानों से धान खरीदने का कोई लक्ष्य नहीं दिया है। जिले की धान उत्पादकता के हिसाब से ही धान खरीदा जाना है। लेकिन, यह एक अनसुलझी पहेली है कि राज्य सरकार अभी भी धान खरीदी के लिए लक्ष्य क्यों दे रही है। उल्लेखनीय है कि ऐसा लक्ष्य पहले नहीं दिया गया था, तो क्या मार्केटिंग फेडरेशन के पास इस बारे में केंद्र सरकार का कोई पत्र है?, इस पर भी किसान सवाल उठा रहे हैं।

अब फिर से लक्ष्य बढ़ने का इंतजार

सरकार ने इस खरीफ सीजन में अब तक गोंदिया जिला मार्केटिंग फेडरेशन का लक्ष्य तीन बार बढ़ाया है। पहले धान खरीद का लक्ष्य 12 लाख 50 हजार क्विंटल, दूसरी बार 6 लाख क्विंटल और तीसरी बार 7 लाख 92 हजार क्विंटल किया गया था। अब तक बढ़ा हुआ धान खरीदी का कुल लक्ष्य 25 लाख 92 हजार भी पूरा होने की राह पर है। वहीं, 56 हजार किसान अभी भी धान बेचने का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए लक्ष्य बढ़ने तक किसानों को फिर से इंतजार करना होगा।

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