

Gondia Paddy Bonus: महायुति सरकार द्वारा किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा कर उसका लाभ दिए जाने के बावजूद धान उत्पादक किसानों के बोनस का मुद्दा अब भी अधर में लटका हुआ है। पिछले आठ महीनों से सरकार बोनस देने का आश्वासन तो दे रही है, लेकिन इसकी घोषणा कब होगी, इस पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने से जिले के करीब डेढ़ लाख किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
किसानों का सवाल है कि जब कर्जमाफी का वादा पूरा हो गया, तो बोनस का भुगतान कब होगा। गोंदिया जिले को धान उत्पादक जिला माना जाता है। यहां खरीफ सीजन में करीब 1.96 लाख हेक्टेयर और रबी सीजन में लगभग 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। दोनों सीजन मिलाकर जिले में करीब 90 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है।
हालांकि बीते चार-पांच वर्षों में खेती की लागत लगातार बढ़ी है। पहले जहां प्रति एकड़ खर्च करीब 15 हजार रु. आता था, वहीं अब यह बढ़कर 22 से 25 हजार रु. तक पहुंच गया है। ऐसे में धान की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। सरकार ने धान उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए पहले प्रति क्विंटल बोनस देने की व्यवस्था की थी, प्रति हेक्टेयर 20 हजार रु. प्रोत्साहन अनुदान (बोनस) दिया जा रहा है। हर वर्ष नागपुर के शीतकालीन विधानसभा सत्र में बोनस की घोषणा होती रही है।
दूसरे खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन पिछले खरीफ सीजन का बोनस अब तक घोषित नहीं हुआ। बोनस का लाभ लेने के लिए किसानों के लिए शासन के पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया था। जिले में 1.56 लाख से अधिक किसानों ने जिला मार्केटिंग फेडरेशन और आदिवासी विकास महामंडल के माध्यम से पंजीयन कराया है। ये सभी किसान बोनस के पात्र हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
पिछले रबी सीजन में अत्तिवृष्टि से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके लिए 9 हजार से अधिक किसानों को मुआवजा स्वीकृत किया गया, लेकिन अब तक राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। ऐसे में बोनस के साथ-साथ फसल नुकसान मुआवजे का इंतजार भी किसानों की चिंता बढ़ा रहा है, किसानों ने राज्य सरकार से दोनों मामलों में शीघ्र निर्णय लेकर राहत राशि जारी करने की मांग की है।