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महाराष्ट्र सरकार ने गोंदिया शहर की नजूल जमीन का बिना मूल्य वर्ग-1 में रूपांतरण करने का निर्णय लिया है।
वर्षों से नजूल जमीन पर निवास कर रहे नागरिकों के लिए मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
विधायक विनोद अग्रवाल ने इस पुरानी समस्या के स्थायी समाधान के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए।
Gondia Land Lease Distribution: गोंदिया शहर की नजूल जमीन पर वर्षों से निवास कर रहे हजारों नागरिकों के मालिकाना हक का सवाल आखिरकार हल होने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। विधायक विनोद अग्रवाल द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के बाद राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में गोंदिया शहर की नजूल जमीन का बिना मूल्य वर्ग-1 में रूपांतरण करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
इस फैसले से वर्षों से जमीन के मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे शहरवासियों को बड़ी राहत मिलने का रास्ता खुल गया है। आजादी के बाद से विस्थापन की पीड़ा के साथ जमीन के पट्टों और मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे सिंधी समाज के नागरिकों के लिए भी विधायक अग्रवाल ने शासन स्तर पर बड़ी जद्दोजहद की है। लगातार प्रयासों के चलते सिंधी समाज को भी जमीन का मालिकाना हक दिलाने का प्रयास अग्रवाल ने किया। 6 नवंबर को सैकड़ो सिंधी समाज के नागरिकों को पट्टे वितरित करने का कार्य अग्रवाल के हस्ते होगा।
विधायक अग्रवाल के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की जगह पर निवास कर रहे 13 हजार नागरिकों व अतिक्रमण की जगह पर निवास कर रहे 5 हजार लोगों को जमीन के पट्टे उपलब्ध कराए जा चुके हैं, कार्यक्रम में स्वयं राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले उपस्थित थे।
इसी दौरान विधायक अग्रवाल ने गोंदिया शहर की नजूल जमीन से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्या को भी प्रमुखता से उठाते हुए इसके स्थायी समाधान की मांग रखी थी। इस निर्णय पर विधायक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व सुनेत्रा पवार तथा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के प्रति आभार व्यक्त किया।
गोंदिया में नजूल जमीन के मालिकाना हक का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। जमीन के पट्टे नहीं मिलने के कारण कई परिवारों को संपत्ति से जुड़े कानूनी अधिकारों, बैंक ऋण और भविष्य में जमीन के हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में नजूल जमीन को वर्ग-1 में परिवर्तित करने का निर्णय शहर के विकास और नागरिकों की संपत्ति संबंधी सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने से वर्षों से लंबित इस समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद बढ़ेगी।