गोंदिया में कुपोषण का संकट; 578 बच्चे अति कुपोषित, अर्जुनी मोरगांव तहसील सबसे प्रभावित

Gondia Health News: गोंदिया जिले में कुपोषण की दर चिंताजनक, 578 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित, सरकार के प्रयासों की जरूरत।
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Gondia Health News: महाराष्ट्र को कुपोषण मुक्त बनाने के सरकारी प्रयासों के बावजूद गोंदिया जिले में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में 578 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए हैं, जबकि कुल 3,771 बच्चे कम वजन की श्रेणी में हैं। जिले में कुपोषण की दर 0.89 प्रतिशत दर्ज की गई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र गोंदिया और अर्जुनी मोरगांव तहसील हैं। गोंदिया तहसील में 134 और अर्जुनी मोरगांव में 121 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। इन दोनों तहसीलों में कुपोषण की स्थिति सबसे गंभीर मानी जा रही है।

अभियान का असर सीमित

राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘राजमाता जिजाऊ कुपोषण मुक्त अभियान’ जिले में अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है। हालांकि, आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषण दूर करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभाव सीमित नजर आ रहा है।

पुराने आंकड़ों से तुलना

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुपोषण में कुछ गिरावट जरूर आई है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

  • मार्च 2013: 6,014 कम वजन, 1,175 गंभीर
  • मार्च 2014: 8,332 कम वजन, 1,732 गंभीर
  • फरवरी 2015: 5,951 कम वजन, 1,179 गंभीर
  • फरवरी 2026: 3,771 कम वजन, 578 गंभीर

आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा असर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुपोषण का सबसे ज्यादा प्रभाव आदिवासी बहुल और दूरदराज गांवों में देखा जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की पहुंच अभी भी चुनौती बनी हुई है।

प्रभावी उपायों की जरूरत

महिला व बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग को समन्वय बनाकर और प्रभावी रणनीति लागू करने की जरूरत है, ताकि कुपोषण को जड़ से खत्म किया जा सके।

प्रशासन का दावा

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजीत गोल्हार के अनुसार, “आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है तथा नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आने वाले समय में कुपोषण में और कमी आएगी।”

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