Gondia News: वेतन नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत कर्मचारियों का कामबंद आंदोलन, हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

Gondia Zilla Parishad: गोंदिया जिले में चार महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में 556 ग्राम पंचायतों के 750 कर्मचारियों ने बेमियादी कामबंद आंदोलन शुरू किया। हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही।
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गोंदिया ग्राम पंचायत कर्मचारी ( सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gondia Gram Panchayat Employees Strike: गोंदिया जिला परिषद के पास निधि उपलब्ध होने के बावजूद जिप प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली तथा कर्मचारी विरोधी नीति से आर्थिक संकट में पड़े अप्रेल माह से वेतन से वंचित ग्राम पंचायत कर्मचारियों ने काम बंद बेमियादी हडताल शुरू कर दी है। और हड़ताल का दूसरा दिन है। भारी बारिश के बावजूद सभी पंचायत समिति कार्यालयों में धरनाप्रदर्शन जारी है। जिसमे जिले की 556 ग्राम पंचायतों के 750 कर्मचारी शामिल होकर जिले की पंचायत समितियों पर धरणा आंदोलन कर रहे हैं।

राज्य महासंघ के कार्याध्यक्ष मिलिंद गणवीर ने बताया की गोंदिया, तिरोड़ा, गोरेगांव, सड़क अर्जुनी, अर्जुनी मोरगांव और देवरी पंस पर धरणा आंदोलन शुरू कर दिया गया हैं। मिलिंद गणवीर, जिला कार्याध्यक्ष महेंद्र कटरे, आयटक जिला सचिव रामचंद्र पाटिल, जिला उपाध्यक्ष भाऊलाल कटंगकार, तहसील अध्यक्ष देवेंद्र मेश्राम व सचिव विनोद शहारे के नेतृत्व में आंदोलन शुरू हैं।

750 ग्राम पंचायत कर्मचारी हड़ताल पर

जिसमें तहसील की 110 ग्रापं के 162 कर्मचारी बंद में शामिल हुए हैं। सडक अर्जुनी में जारी आंदोलन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष चत्रूगण लांजेवार, सचिव विष्णु हत्तीमारे, खुशाल बनकर, तिरोड़ा में पंस के सामने जारी आंदोलन का नेतृत्व जिला सचिव रवींद्र किटे, तहसील अध्यक्ष लोमेश पारधी, सचिव आशीष उरकुडे, गोरेगांव में आयटक के जिलाध्यक्ष हौसलाल रहांगडाले, जिला सहसचिव बुधराम बोपचे, तहसील अध्यक्ष तुलशी चौधरी, अर्जुनी मोरगांव में तहसील अध्यक्ष ईश्वरदास भंडारी, सचिव सुरज रामटेके तथा देवरी में गजेंद्र हिरवानी और मनोज जनबंधू के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू हैं।

वेतन भुगतान की मांग तेज

उल्लेखनीय हैं की राज्य के ग्राम विकास विभाग द्वारा वेतन पर अनुदान व भविष्य निर्वाह निधि की राशि पंचायत राज व्यवस्थापन कक्ष पुणे के माध्यम से जिला परिषदों को उपलब्ध कराता हैं तथा यह निधि पंचायत समितियों द्वारा कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा की जाती हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया 7 दिनों के भीतर पूरी की जा सकती हैं और इस आशय की सूचना संबंधित विभाग ने भी दी हैं।

556 ग्राम पंचायतों के कर्मचारी हड़ताल पर

इसके बावजूद 4 महीने बीत जाने पर भी कर्मचारियों को वेतन ना मिलना गोंदिया जिला परिषद की लचर और गैरजिम्मेदार अधिकरियों की कार्यपद्धति को उजागर करता है। वेतन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग राज्य महासंघ के कार्याध्यक्ष मिलिंद गणवीर ने की हैं। इसी सवाल को लेकर प्रतिमाह, 5 तारीख के भीतर वेतन अदायगी की मांग को लेकर 11 मई को जिप पर भव्य मोर्चा निकाला गया था तब तत्कालीन सीईओ मुरगानंथम ने इस मांग को मान्य कर स्पष्ट निर्देश उप सीईओ ग्रापं को दिए थे।

4 महीने से वेतन नहीं

लेकिन उनके स्थानांतरण पश्चात अनदेखी की जा रही हैं जिससे ग्रामीण विभाग का यह अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों को जिन पर ग्राम विकास की विभिन्न योजनाओं की जिम्मेदारी हैं, उन पर भुखमरी का संकट छाया हुआ हैं। संगठन द्वारा बारबार ज्ञापन देने और अधिकारियों से चर्चा के बावजुद इस ओर निरंतर दुर्लक्ष किए जाने और तुरंत वेतन अदायगी और गैरजिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए जारी आंदोलन की मांगे मान्य ना होने पर आंदोलन को और भी तीव्र करने की चेतावनी गणवीर ने दी हैं।

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