गोंदिया के गंगाझरी ग्राम पंचायत में करोड़ों का भ्रष्टाचार! ग्राम अधिकारी व सरपंच पर लगे गंभीर आरोप

Gram Panchayat Scam: गोंदिया तहसील की स्मार्ट ग्राम पंचायत गंगाझरी में सरपंच और ग्राम अधिकारी द्वारा करोड़ों रुपये की निधि की अफरा-तफरी करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिप सीईओ से शिकायत की है।
गंगाझरी ग्राम पंचायत में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, ग्रामीणों ने जिप CEO से की जांच की मांग
पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य रामसिंग पंधरे, हेमंत बघेले, नीलकंठ गायधने, योगेश पगरवार, छगन लिल्हारे, नरगेश सोरले, गौरव लिल्हारे, हितेश उइके (सोर्स - नवभारत)
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Gondia Gangajhari Smart Gram Panchayat Corruption Allegations: गोंदिया तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गंगाझरी को 'स्मार्ट ग्राम पंचायत' पुरस्कार से नवाजा गया है, लेकिन दूसरी ओर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यहां विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। इस संबंध में जिला परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से लिखित शिकायत की गई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकारी निधि की अफरा-तफरी करने वाले गोंदिया ग्राम पंचायत के संबंधित अधिकारियों तथा सरपंच पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनसे निधि की वसूली की जाए। इस तरह की जानकारी स्थानीय नागरिकों ने आयोजित एक चर्चा के दौरान दी।

करोड़ों की निधि की अफरा-तफरी का आरोप

इस चर्चा के दौरान पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य रामसिंग पंधरे, हेमंत बघेले, नीलकंठ गायधने, योगेश पगरवार, छगन लिल्हारे, नरगेश सोरले, गौरव लिल्हारे, हितेश उइके आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इन नागरिकों और पदाधिकारियों ने बताया कि ग्राम पंचायत के ग्राम अधिकारी व सरपंच ने अपनी कार्य अवधि के दौरान करोड़ों रुपये की सरकारी निधि की अफरा-तफरी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास कार्यों के लिए अनिवार्य ई-निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये निकाल लिए गए।

आदिवासी सांस्कृतिक भवन के निर्माण में अनियमितता

ग्रामीणों ने एक विशिष्ट उदाहरण देते हुए बताया कि गोंदिया जिला निधि के अंतर्गत गंगाझरी में एक 'आदवासी सांस्कृतिक भवन' मंजूर हुआ था। नियमानुसार इस भवन का निर्माण तयशुदा जगह पर होना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करते हुए इसका निर्माण किसी अन्य जगह पर कर दिया गया और इस तरह निधि की हेराफेरी की गई।

इसके अलावा ग्राम पंचायत भवन की मरम्मत और दुरूस्ती के नाम पर भी बिना काम किए लाखों रुपये निकाल लिए गए हैं। इस प्रकार विभिन्न शासकीय कार्यों के नाम पर घोर अनियमितता बरतते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे मामले को लेकर सजग ग्रामीणों ने जिला परिषद के सीईओ से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। शिकायत में मांग की गई है कि ग्राम पंचायत अधिकारी व सरपंच के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए और उनके द्वारा अफरा-तफरी की गई पूरी निधि शासकीय खजाने में वापस जमा कराई जाए। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर शिकायत पर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए और दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास किया, तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों की ओर से तीव्र आंदोलन किया जाएगा।

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