गोंदिया में वन विभाग का अलर्ट, खेत का कचरा जलाते समय रखें विशेष सावधानी
Farm Waste Burning: गोंदिया जिले में खरीफ सीजन की तैयारी के दौरान खेतों में कचरा और सूखी झाड़ियों को जलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने किसानों से सावधानी बरतने की अपील की है।
Forest Fire Risk (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Gondia Forest Department : किसान खरीफ के कृषि कार्य में जुट गया है। इसके लिए किसान कृषि कार्य में खेत की मेढ़, कचरा, झाड़ियों की कटाई और सूखा हुआ कचरा जलाने का काम कर रहे हैं। जंगल से सटे खेत परिसर में जलाया गया कचरे का तिनका वन संपत्ति समेत वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकता है।
इसलिए खेत का कचरा जलाते समय सावधानी बरतने का आव्हान वन विभाग ने किया है। जिले में बड़े पैमाने पर जंगल है। गर्मी के दिनों में जंगल में आग लगने की घटनाएं न हो इसके लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। आग प्राकृतिक व मानवी निर्मित भी लग सकती है।
वन संपदा और वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा
जंगल से सटे खेत में कचरा जलाने से वन संपदा जल सकती है। इसमें वन्यजीवों की जान को खतरा हो सकता है। खेत करीब के गांवों में भी आग लग सकती है। इसलिए कचरे को आग लगाते समय ध्यान रखें। इसी के साथ वन कर्मियों को जंगल क्षेत्र में गस्त बढ़ाने की जरूरत है।
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अनुचित प्रकार दिखाई देने पर नागरिक वन विभाग से शिकायत कर सकते हैं। खरीफ मौसम की शुरुआत में खेत को उपजाऊ करने के लिए खेत का कचरा जलाया जाता है। फसलों की तनस, झुड़पी पौंधो को जलाया जाता है। जिससे खेत का कचरा नष्ट हो जाता है।
खरीफ सीजन में खेतों में आग लगाने पर चेतावनी
इसके अलावा जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है, ऐसा किसान मानते हैं। लेकिन ऐसा करने से खेत की उपजाऊ क्षमता कम होती है। किसानों को खेत में कचरा न जलाने की सलाह कृषि विभाग ने दी है। रासायनिक खाद घातक है। पहले रासायनिक खाद का उपयोग कम मात्रा में होता था। तब किसान खेत में बची फसल के तनस, जैविक खाद, खेत के कचरे को सड़ाकर खाद तैयार करते थे। जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता अधिक थी। जिससे कई वर्षों तक जमीन की उपजाऊ क्षमता कायम रहती थी। लेकिन रासायनिक खाद से जमीन की उपजाऊ क्षमता कम हो रही है, यह घातक है।
