Gondia में जनगणना टीमों का विरोध, शिक्षकों को गांव में घुसने पर मिली धमकियां

Census Work Protest: गोंदिया जिले में भीषण गर्मी के बीच जनगणना कार्य में जुटे शिक्षकों को जनता के भारी विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में एंट्री बैन की तख्तियां तक लगा दी गई हैं।
Gondia Census Duty Teachers Problem
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
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Teachers Face Public Fury: गोंदिया जिले के भीतर इस समय शासकीय स्तर पर जनगणना की महत्वपूर्ण प्रक्रिया बड़े पैमाने पर चलाई जा रही है। इस राष्ट्रीय कार्य को समय पर पूरा करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिक और माध्यमिकशालों के शिक्षकों को बड़े पैमाने पर प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। लेकिन धरातल पर इस कार्य को पूरा करने में शिक्षकों के पसीने छूट रहे हैं। एक तरफ जहां मई महीने की चिलचिलाती और झुलसा देने वाली धूप है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और राजनीतिक कारणों से जनगणना का कड़ा विरोध किया जा रही है। स्थिति यह है कि कई क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक प्रतिसाद मिलना तो दूर, शिक्षकों को सीधे तौर पर धमकियां दी जा रही हैं।

गर्मी का टॉर्चर और एक ही घर के लगाने पड़ रहे कई चक्कर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनगणना प्रक्रिया के लिए गोंदिया जिले में बड़ी संख्या में शिक्षकों को नियुक्त किया गया है। इस काम के लिए शिक्षक सुबह से शाम तक चिलचिलाती धूप में घूम-घूमकर लोगों से जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें कई जगहों पर लोगों के घर पर न होने, कुछ के जानकारी देने में आनाकानी करने, चिलचिलाती धूप जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से उन्हें एक घर के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शहर के कुछ हिस्सों समेत ग्रामीण इलाकों में लोगों से उम्मीद के मुताबिक प्रतिसाद नहीं मिल रहा है। बढ़ती गर्मी, लंबे सफर और अतिरिक्त काम के तनाव से शिक्षक थके हुए हैं।

चुलोद जैसे गांवों में एंट्री बैन, नेताओं ने दी चेतावनी

जनगणना प्रक्रिया का सबसे चुनौतीपूर्ण रूप तब सामने आया जब शिक्षकों की टीमें गांवों के भीतर पहुंचीं। कई इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जनगणना का सामूहिक बहिष्कार कर दिया है। इस गंभीर स्थिति को लेकर ड्यूटी पर तैनात शिक्षिका यशोधरा सोनेवाने ने जमीनी हकीकत बयां की है।

"गए, जैसे ही गांव गए, जनगणना का भारी विरोध होने लगा। पर्यवेक्षक को बार-बार निर्देश दिए गए। जानकारी तहसीलदार को दी। तहसीलदार ने ओबीसी के घरों पर ताला दिखाने का आदेश जारी किया है। चुलोद के नेताओं ने आने से रोका। उम्मीद है कि प्रशासन इसका कोई हल निकालेगा।"

सुरक्षा को लेकर डर का माहौल, तख्तियां लगाकर विरोध

इस अभियान में लगे एक अन्य शिक्षक संजय कुमार बिसेन ने भी अपनी ड्यूटी के दौरान आने वाले खतरों और ग्रामीणों के उग्र व्यवहार को लेकर चिंता व्यक्त की है।

"गांव वाले जनगणना के काम का कड़ा विरोध कर रहे हैं।अब तक 50 प्रश। काम बहुत रिस्क लेकर पूरा हुआ है। कुछ गांव वालों ने जनगणना के लिए गांव में कदम न रखने की धमकी दी है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।"

इसी मुद्दे पर शिक्षक यशवंत गोखे ने प्रशासन की उदासीनता और शिक्षकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि इस पूरे मामले में शिक्षकों को बिना किसी सुरक्षा के छोड़ दिया गया है।

"जनगणना भारी विरोध के बावजूद, प्रशासन से उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिल रहा है। जनगणना का काम शिक्षकों पर थोप दिया गया है। गांववालों ने गांव में तख्तियां लगाकर जनगणना का विरोध किया है। अगर गांववालों ने शिक्षकों पर हमला किया, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।"

शिक्षकों और उनके विभिन्न संगठनों ने अब इस मामले में जिला प्रशासन और जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप करने तथा ड्यूटी पर तैनात प्रगणकों को उचित सुरक्षा मुहैया कराने की पुरजोर मांग की है।

गोंदिया जिला शहर व तहसील स्तर पर प्रगणक एवं प्रर्यवेक्षक वर्गीकरण तालिका

शहर / तहसील प्रगणक / प्रर्यवेक्षक संख्या स्कूल शिक्षक अनुदानित शिक्षक निजी व्यक्ति
गोंदिया 574 315 104 155
नप गोंदिया 268 226 00 42
तिरोड़ा 319 319 00 00
नप तिरोड़ा 61 16 23 22
गोरेगांव 224 100 103 21
नपं गोरेगांव 23 06 17 00
सड़क अर्जुनी 226 191 31 04
नपं सड़क अर्जुनी 18 04 07 07
अर्जुनी मोरगांव 289 186 60 43
नपं अर्जुनी मोरगांव 24 23 00 01
देवरी 199 184 08 07
नपं देवरी 35 01 27 07
सालेकसा 180 152 00 28
नपं सालेकसा 24 13 08 03
आमगांव 178 120 21 37
नप आमगांव 65 60 00 05
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