गोंदिया में कुपोषण मिटाने के लिए बच्चों के पोषण और किशोरियों के हीमोग्लोबिन पर दें विशेष ध्यान, दीपक सावंत

Gondia News: कुपोषण कम करने के लिए बच्चों के पौष्टिक आहार पर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ. सावंत ने दी जानकारी।
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Gondia Dr. Deepak Sawant News: गोंदिया जिले में कुपोषण दर कम करने के लिए बच्चों के पौष्टिक आहार और लड़कियों के खून में हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। ऐसी सूचना राज्य के टास्क फोर्स कुपोषण निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ। दीपक सावंत ने जिलाधीश कार्यालय के सभागृह में टास्क फोर्स कुपोषण निर्मूलन व संक्रामक बीमारी नियंत्रण पर समीक्षा सभा में दिए।

सभा में निवासी उप जिलाधीश भैयासाहब बेहेरे, प्रभारी जिप सीईओ प्रमिला जाखलेकर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.अभिजीत गोल्हार, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम पटले, आदिवासी विकास प्रकल्प अधिकारी उमेश काशिद, उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी महिला और बाल कल्याण कीर्तिकुमार कटरे, शिक्षाधिकारी माध्यमिक सुधीर महामुनि, शिक्षाधिकारी प्राथमिक विशाल डोंगरे, मेडिकल कॉलेज के डीन के प्रतिनिधि डॉ। विनायक रुखमोड़े उपस्थित थे।

डॉ. सावंत ने कहा कि जिले के सरकारी और गैरसहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों में हर लड़की के खून में हीमोग्लोबिन की जांच हर तीन महीने में होनी चाहिए। गांव स्तर पर आशा सेविका, आंगनवाड़ी सेविका और स्वास्थ्य सेविकाएं अपने कार्यक्षेत्र की गर्भवती और स्तनदा माता के घर भेंट देकर विशेष ध्यान दें।

जनभागीदारी से काम करने की जरूरत उन्होंने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी में बच्चों के वजन और उंचाई बढ़ाने के लिए उनके पौष्टिक खाने पर विशेष जोर दिया जाए। डॉ। सावंत ने आगे कहा कि जिले में कुपोषण की दर कम करने के लिए स्वास्थ्य, महिला व बाल कल्याण, आदिवासी विकास प्रकल्प, शिक्षा और पंचायत विभागों को जनभागीदारी से काम करने की जरूरत है।

उन्होंने आंगनवाड़ी सेविकाओं को निर्देश दिया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में SAM और MAM बच्चों पर खास ध्यान दें और कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए पास के आहार पुनर्वसन केंद्र में भर्ती कराएं। आंगनवाड़ी में हर बच्चे का कम से कम तीन बार वजन किया जाए और उनकी SAM और MAM श्रेणी तय की जाए। बच्चों को उनकी पसंद का पौष्टिक खाना देने पर खास ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग मां और बच्चे की मौत की दर कम करने पर खास ध्यान दें, जिसके लिए लोगों में शुरुआती बचाव के तरीकों के बारे में जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जाए। प्रस्तावना डॉ. अभिजीत गोल्हार ने रखी। बैठक में डॉ. तृप्ति कटरे, डॉ. महेंद्र धनविजय, डॉ. विनोद चव्हाण, डॉ. निरंजन अग्रवाल, नीलेश जाधव, डॉ. लीना धांडे, डॉ. सचिन उइके, डॉ. निकिता पोयाम, प्रशांत खरात आदि उपस्थित थे।

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