मकान व जनगणना पर बहिष्कार सकल ओबीसी संगठनों की चेतावनी, जनगणना कॉलम में ओबीसी का उल्लेख नहीं

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई जनगणना में ओबीसी के लिए स्वतंत्र कॉलम न होने पर ओबीसी संगठनों ने बहिष्कार की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक ओबीसी का उल्लेख नहीं होगा।
मकान व जनगणना पर बहिष्कार सकल ओबीसी संगठनों की चेतावनी, जनगणना कॉलम में ओबीसी का उल्लेख नहीं 
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Gondia News: केंद्र सरकार की ओर से जनगणना शुरू कर दी गई है. पहले चरण में घरों की गिनती की जा रही है. हालांकि, इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति का उल्लेख है. लेकिन, ओबीसी के लिए कोई स्वतंत्र कॉलम नहीं दिया गया है. केंद्र सरकार बारबार ओबीसी के प्रति सहानुभूति दिखाती है. लेकिन व्यवहार में ओबीसी के साथ अन्याय हो रहा है.

इसलिए, जब तक कि जनगणना में मकानों सहित ओबीसी के लिए एक स्वतंत्र कॉलम नहीं रखा जाता, तब तक जनगणना पर बहिष्कार डाला जाएगा, ऐसी चेतावनी 24 अप्रैल को ओबीसी संघर्ष कृति समिति व सकल ओबीसी समिति ने दी है. केंद्र सरकार की ओर से जनगणना शुरू कर दी गई है. देशभर में इसकी शुरुआत 1 अप्रैल से हो गई है. प्रथम चरण में मकानों की जनगणना की जा रही है.

मकानों की जानकारी ग्रापं के पास है. फिर भी, उनकी गिनती अभी भी की जा रही है. इसमें अनुसूचित जाति व जनजाति का उल्लेख किया गया है. लेकिन इसमें ओबीसी के लिए कोई प्रावधान नहीं है. इससे पहले 25 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार की कैबिनेट में ओबीसी की स्वतंत्र जनगणना कराने का फैसला लिया गया था. केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भी यही कहा. इसलिए राजनीतिक नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए बैनर लगाए.

जातिवार जनगणना के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल 2026 को तीन दिवसीय विशेष सत्र का भी आश्वासन दिया गया. लेकिन असल में जनगणना के दौरान ओबीसी वर्ग को इससे बाहर कर दिया गया. वर्तमान में ओबीसी को मकान गणना से बाहर रखा गया और अन्य लोगों में शामिल किया गया. स्वतंत्र कॉलम नहीं तो गिनती नहींयह सरकार आगामी जनगणना में भी ओबीसी की अलग से गिनती नहीं करेगी. तो ये ओबीसी वर्ग के साथ किया गया एक बड़ा धोखा है. आजादी के बाद के 75 वर्षों में हर सरकार ने इस वर्ग को खतरे में डाला है.

इसलिए संगठन के अध्यक्ष बबलू कटरे ने चेतावनी दी है कि जब तक जनगणना के दौरान ओबीसी के लिए स्वतंत्र कॉलम नहीं बनाया जाएगा, तब तक ओबीसी समुदाय जनगणना का बहिष्कार करेगा. इस अवसर पर अमर वराडे, मनोज मेंढे, सुनील पटले, खेमेंद्र कटरे, कैलाश भेलावे, राजेश चांदेवार, सुनील भोंगाडे, कैलाश टेंभरे, माधवराव तरोणे आदि उपस्थित थे. मकान गणना सें भी ओबीसी बाहरमकानों की गणना में अनुसूचित जाति व जनजाति का उल्लेख किया गया है.

ऐसा करके सरकार क्या साबित करना चाहती है ओबीसी संगठनों की ओर से सवाल उठाया गया था कि अगर सरकार जनगणना में ओबीसी को शामिल करना चाहती है तो मकानों की जनगणना से ओबीसी वर्ग को बाहर क्यों रखा गया. जो ओबीसी नेता अब अपनी जाति के लिए नहीं लड़ते, उन्हें भी चेतावनी दी गई कि समाज उन्हें सबक सिखाएगा और कभी उनके पास जाकर उनकी समस्याएं नहीं उठाएंगे.

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