भिवापुर में 10 घंटे चला रास्ता रोको आंदोलन, तिरोड़ा के भिवापुर में कचरे के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन

Bhivapur Villagers Protest: तिरोड़ा तहसील के भिवापुर में कचरा डंपिंग के विरोध में ग्रामीणों ने ‘कचरा रोको-रास्ता रोको’ आंदोलन किया। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
bhivapur garbage dumping protest tiroda road blockade
भिवापुर आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhivapur Garbage Dumping: गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील के भिवापुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में तिरोड़ा नगर परिषद द्वारा कथित रूप से किए जा रहे कचरा डंपिंग के विरोध में ग्रामीणों ने ‘कचरा रोको-रास्ता रोको’ आंदोलन किया। महात्मा गांधी पुतला चौक पर सुबह 8 से शाम 6 बजे तक चले इस आंदोलन में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

ग्रामीणों का आरोप है कि भिवापुर क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से बिना आवश्यक अनुमति के तिरोड़ा शहर का कचरा डाला जा रहा है। इसके कारण गांव में प्रदूषण और बीमारी का खतरा बढ़ गया है। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने ‘कचरा गांव से हटाना है, गांव की शान बढ़ाना है’ तथा ‘जन्मभूमि के सम्मान में इस माटी के बेटे मैदान में’ जैसे नारे लगाकर विरोध जताया।

एनओसी नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में भिवापुर में कचरा डंपिंग के लिए आवश्यक एनओसी नहीं होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में यहां ‘जैविक खाद निर्माण परियोजना’ के नाम पर अनुमति लेकर शासन से निधि मंजूर कराई गई थी, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से खाद निर्माण के बजाय उक्त जगह का इस्तेमाल डंपिंग यार्ड के रूप में किया जा रहा है।

निष्पक्ष जांच कराने की मांग

इस मामले में ग्रामीणों ने निधि के कथित दुरुपयोग व भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और भिवापुर में तत्काल कचरा डालना बंद करने की मांग रखी। आंदोलन का नेतृत्व विमुस अध्यक्ष नलिंद्र मेश्राम व उपाध्यक्ष देवेंद्र रामटेके ने किया। इस अवसर पर राहुल रामटेके, खेमराज तुरकर, अनिल सूर्यवंशी, हेमराज मेश्राम, संजय सयाम, चंद्रकुमार मेश्राम, भाऊराव भगत, लक्ष्मण बारापात्रे, भैयालाल पटले, विजय ठाकरे, रतनलाल उईके, मोतीलाल पटले, अरुण मेश्राम, अमित दुबे, राजकमल रंगारी, पवन भगत, प्रवीण पटले, सौरभ रंगारी, योगेश्वर उईके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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20 साल से समस्या, अब आर-पार की लड़ाई

आंदोलनकारियों ने कहा कि लंबे समय से गांव में कचरा डाले जाने से स्थानीय लोगों को दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इसे केवल कचरे का मुद्दा नहीं, बल्कि गांव के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न बताया।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

भिवापुर में कचरा डंपिंग तत्काल बंद की जाए, डंपिंग यार्ड की वैधता व अनुमति की जांच की जाए, जैविक खाद परियोजना के नाम पर मंजूर निधि की जांच हो। कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। गांव के पर्यावरण व नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान किया जाए।

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