

चामोर्शी: विदर्भ की काशी के रूप में परिचित मार्कंडादेव का प्राचीन मार्कंडेश्वर मंदिर वैनगंगा नदी के तट पर स्थित है. लेकिन विकास की दृश्टि से विगत अनेक वर्षो से इस मंदिर की ओर अनदेखी हो रही है. विगत 8 वर्षो से मंदिर जिर्णोद्धार का कार्य प्रलंबित है. जिससे श्रद्धालुओं में व्यापक नाराजगी है. मार्कंडा देवस्थान के जिर्णोद्धार का प्रश्न आगामी नागपुर शितकालीन अधिवेशन में कोन उठाऐगा, ऐसा सवाल श्रद्धालुओं द्वारा पुछा जा रहा है.
हजारों वर्ष पूर्व स्थापित किया मार्कंडेश्वर मंदिर काफी पुरातन है. इस जगह महाशिवरात्री के दिन बडा मेला लगता है. इस मंदिर की ओर भारतीय पुरातत्व विभाग, पर्यटन विकास विभाग ने अबतक ध्यान नहीं देने से मंदिर की वर्तमान स्थिती में दयनीय अवस्था हुई है. विगत 8 वर्षो से इस मंदिर के जिर्णोद्धार का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है. जिससे श्रद्धालुओं को व्यापक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. देवस्थान स्ट्रस्ट के अध्यक्ष गजानन भांडेकर यह जिर्णोद्धार जल्द हो, इसलिए विगत 8 वर्षो से दिल्ली, मुंबई के चक्कर काट रहे है. लेकिन उनके प्रयासों को अबतक सफलता नहीं मिली है. इस दौरान केवल आश्वासनों की ही खैरात बांटी गई.
मुंबई में हुए बजट में महाराष्ट्र के अनेक धार्मिक स्थलों का विकास करने के लिए करोडों रूपयों का प्रावधान किया गया. लेकिन विदर्भ के मार्कंडेश्वर इस प्राचिन धार्मिक स्थल को बजट में स्थान नहीं मिला. वर्तमान सरकार में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यह विदर्भ के है. वहीं गड़चिरोली जिले का पालकमंत्री पद भी उनके पास है. वे आगामी आगामी शितकालिन अधिवेशन में मार्कंडा देवस्थान का प्रश्न उपस्थित कर निधि दिलाऐंगे क्या इस ओर सभी की निगाहें गढी है. कुछ माह पूर्व जिले के अहेरी विस क्षेत्र के विधायक धर्मरावबाबा आत्राम यह राज्य के मंत्रीमंडल में कैबिनेट मंत्री बने. वे इस प्रश्न को उठाऐंगे क्या ऐसी अपेक्षा व्यक्त हो रही है.