Gadchiroli KPCL Coal Mine News: गड़चिरोली बरांज मोकासा की केपीसीएल कोयला खदान परियोजना को लेकर प्रभावितों ने पुनर्वसन और मुआवजे में भारी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रकल्पग्रस्तों का कहना है कि उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वसन एवं पुनर्स्थापन अधिनियम (LARR Act 2013) का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
प्रभावित परिवारों के अनुसार, कंपनी द्वारा घरों के मुआवजे में भेदभाव किया गया है। वर्षों से निवासरत कई परिवारों को नए नियमों के नाम पर अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि कुछ को मनमाने तरीके से लाभ दिया गया। पुनर्वसन के तहत मिलने वाली 22 आवश्यक सुविधाएं पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा भी उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे विस्थापितों का जीवन संकटग्रस्त हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के मदद एवं पुनर्वसन मंत्री मकरंद जाधव पाटिल के समक्ष 15 अप्रैल 2026 को मंत्रालय, मुंबई में सुनवाई तय की गई है। प्रभावितों ने जिला पुनर्वसन अधिकारी पर भी लापरवाही और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं।
विशाल दुधे, विठ्ठल पुनवटकर, अरविंद देवगड़े, पांडुरंग सातपुते, निलेश कोरडे, सुप्रिया दागावकर सहित अनेक प्रकल्पग्रस्तों ने एकजुट होकर न्याय की गुहार लगाई है। मामले में वन, पुनर्वसन, श्रम, खनन, पर्यावरण विभाग, नागपुर संभागीय आयुक्त, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, चंद्रपुर कलेक्टर और संबंधित कंपनी को पक्षकार बनाया गया है।
प्रभावितों का कहना है कि परियोजना से उनका घर और आजीविका दोनों प्रभावित हुए हैं, ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा और समुचित पुनर्वसन मिलना उनका अधिकार है। अब सभी की नजरें 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।