गड़चिरोली: उपेक्षा की मार झेल रहा ऐतिहासिक टिपागढ़ किला; गोंडकालीन विरासत को बचाने के लिए संरक्षण की गुहार

टिपागढ़ किला जर्जर हालत में, मरम्मत की मांग। गड़चिरोली में ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा खतरे में।
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Gadchiroli Tourism News: कोरची तहसील के अतिसंवेदनशील व दुर्गम क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक टिपागढ़ किला सरकारी अनदेखी के कारण जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। प्रकृति की गोद में बसा यह प्राचीन किला, जो गोंडराजा पुरमशहा के शासनकाल की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है, आज संरक्षण के अभाव में अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है।

कोरची मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित यह किला ऊंची टेकड़ी पर बना है, जहां तक पहुंचने के लिए लगभग एक हजार फीट की चढ़ाई करनी पड़ती है। कोरची से कोटगुल-ग्यारापट्टी मार्ग पर न्याहाकल गांव के समीप स्थित यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।

किले की विशेषता यह है कि पहाड़ी पर एक बड़ा तालाब स्थित है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता। इस कारण इसे प्रकृति का अनोखा चमत्कार माना जाता है। इसी किले से टिपागड़ी नदी का उद्गम भी होता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

हालांकि, मरम्मत के अभाव में किले की सुरक्षा दीवारें ढहने लगी हैं और पूरा ढांचा खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस किले का संरक्षण और विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

श्रद्धा का केंद्र भी है टिपागढ़

टेकड़ी पर स्थित तालाब के किनारे मां दुर्गा और हनुमान मंदिर हैं, जबकि दक्षिण दिशा में गुरुबाबा ऋषि की समाधि स्थित है। यह स्थान महाराष्ट्र सहित छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष माघ माह में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

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