बैठक में मौजूद ग्रामीण (फोटो नवभारत)
Gadchiroli 30 Villages Liquor Ban: महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले से सामुदायिक एकजुटता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। कोरची तहसील के जांभली इलाके में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में 30 गांवों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में अपने क्षेत्र को ‘अवैध शराब मुक्त’ बनाने का संकल्प लिया है। यह निर्णय न केवल सामाजिक स्वास्थ्य बल्कि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में ‘मुक्तिपथ’ अभियान के तहसील संगठक धर्मेंद्र बोपचे मुख्य मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शराब और तंबाकू के सेवन से होने वाले घातक शारीरिक, वित्तीय और सामाजिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। बोपचे ने स्पष्ट किया कि “स्वस्थ समाज और सुखी परिवार के लिए नशा मुक्ति ही एकमात्र विकल्प है।”
बैठक में पेसा (PESA) कानून के तहत ग्रामसभाओं को मिलने वाले अधिकारों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि कानूनन ग्रामसभा के पास अपने क्षेत्र में शराब की बिक्री और वितरण पर नियंत्रण रखने की शक्ति है। जिन गांवों ने पहले ही शराबबंदी लागू कर दी है, उनके अनुभवों को साझा करते हुए इसे स्थायी रूप से बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई।
नशा मुक्ति के साथ-साथ बैठक का एक मुख्य केंद्र ‘जल, जंगल और जमीन’ का संरक्षण भी था। इलाके के प्रमुख राजाराम नैताम की अध्यक्षता में हुई इस चर्चा में यह बात उभर कर आई कि नशा न केवल स्वास्थ्य बिगाड़ता है, बल्कि स्थानीय संसाधनों पर ग्रामीणों के नियंत्रण को भी कमजोर करता है।
इस बैठक में 11 गांव पुजारी सुनील मड़ावी, विभिन्न गांवों के भूमिया, पुलिस पटेल, सरपंच, मुक्तिपथ के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में जागरूक युवा उपस्थित थे। सामूहिक शपथ के साथ इस मुहिम को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।