गड़चिरोली के ग्रामीण अंचलों से लुप्त हो रहा बायोगैस, घटते पशुधन और आधुनिक यंत्रों के बढ़ते उपयोग से संकट में
गोबर गैस का उपयोग घट रहा है, पशुधन की कमी और आधुनिक यंत्रों के कारण ग्रामीण क्षेत्र में गोबर गैस कालबाह्य हो रही है।
Gadchiroli Biogas Gobar Gas News: अपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत में से एक होने वाले गोबर गैस बायोगैस की संकल्पना उपयुक्त साबित हो रही थी। ग्रामीण क्षेत्र के परिवार के लिए तो बायोगैस वरदान साबित होता था।
किंतु पशुधन घटने से गोबर खाद कम होने से एक समय में महत्वपूर्ण घटक होने वाला गोबर गैस अब ग्रामीण अंचल से कालबाह्य होता दिखाई दे रहा है। गड़चिरोली जिला खेती प्रधान जिले के रूप में पहचाना जाता है। जिस कारण जिले में पशुधन की संख्या भी काफी थी। जिससे जिले के ग्रामीण अंचल में गोबर गैस की संख्या अधिक थी।
किंतु विगत अनेक वर्षों से जिले का पशुधन निरंतर कम होने से गोबर मिलना भी मुश्किल होने से गोबर गैस का उपयोग करना भी असुविधाजनक हो रहा है। खेती के साथ खेती पूरक व्यवसाय के रूप में किसान कुक्कूटपालन, बकरी पालन, मवेशी पालन करते थे। इन मवेशियों के कारण ईंधन मिलता था। जिससे अधिकांश किसानों के घर पहले गोबरगैस देखने को मिलता था।
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किंतु बदलते समय के चलते यंत्रों का उपयोग बढ़ने के साथ ही चारा समस्या निर्माण होने से पशुधन में व्यापक गिरावट हुई। खेत में आधुनिक यंत्रों का उपयोग बढ़ने से दिन ब दिन मवेशियों की संख्या घट रही है। जिससे गोबरगैस अब कालबाह्य दिखाई दे रही है।
घटते पशुधन के विभिन्न कारणपशुधन के गिरावट के लिए पशुपालकों के विभिन्न कारण है। चारा व पानी के अभाव में मवेशियों की अपेक्षा होती है। वहीं खेती में अब आधुनिक यंत्रों का उपयोग बढ़ने से अनेक किसान मवेशी पालना कम कर रहे है। पशुपालक मवेशी बिक्री करने हेतु नापसंदी दर्शाते है।
वहीं चारे की समस्या के कारण अनेक किसान पशुधन कम करने की स्थिति में है। पशुधन घटने के कारण निश्चित ही गोबर गैस भी ग्रामीण क्षेत्र के प्रकल्प भी आधुनिक दौर में विलुप्त हुए है।
समय की बचत में अनदेखीपशुधन के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के अनेक गोबर गैस विलुप्त हुए है। उसकी जगह अब एलपीजी सिलेंडर ने ली है। विगत कुछ वर्षों में यांत्रिकीकरण के कारण बदलाव हुए है। समय की बचत व अधिक आय की गर्दिश में किसान पशुपालन की ओर अनदेखी करता आया है।
जिस कारण पशुधन को बढ़ाने हेतु सरकारी स्तर पर उपाययोजना करने की आवश्यकता है।
उपाययोजना करने की आवश्यकतावर्तमान स्थिति में भले ही जिले में गोधन की संख्या कम हो गई है। लेकिन दूसरी ओर वर्तमान स्थिति में महंगाई काफी बढ़ गई है। जिससे पहले ही तरह इस संदर्भ में किसानों में जनजागृति कर उपाययोजना करना जरूरी है।
