गडचिरोली के किसानों के लिए ई-फसल पंजीयन बना सिरदर्द, खरीफ फसल पर असर संभव

Gadchiroli Farmers News: गडचिरोली के आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी से किसान ई-फसल पंजीयन नहीं कर पा रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों से खरीफ सीजन में परेशानी बढ़ने की आशंका है।
E-Crop Registration Becomes a Headache for Gadchiroli Farmers; Impact on Kharif Crops Possible
ई-फसल पंजीयन, गडचिरोली किसान,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Gadchiroli e-Crop Registration: गडचिरोली दुर्गम तथा आदिवासी बहुल क्षेत्र के किसानों के लिए ई-फसल पंजीयन की शर्त अब सिरदर्द साबित हो रही है। वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में नेटवर्क के अभाव में अनेक किसानों की ई-फसल पंजीयन नहीं हो पायी, सरकार के ऑनलाईन प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों का फटका किसानों को लग रहा है, वहीं इसके गंभीर परिणाम आगामी खरीफ सीजन में भी दिखाई देने की बात कहीं जा रही है।

नेटवर्क की समस्या

सिरोंचा तहसील के साथ ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की बडी समस्या कायम है। अनेक गांवों में मोबाईल नेटवर्क उचित रूप से उपलब्ध नहीं होने से किसानों कोई-फसल पंजीयन करने के लिए निरंतर सरकारी कार्यालय, सेवा केंद्र तथा इंटरनेट सुविधाओं का सहारा लेना पड़ा, लेकिन, नेटवर्क समस्या तथा तकनीकी दिक्कतों के चलते अनेक किसानों का पंजीयन अधूरा रहा। इस दौरान राज्य के अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री ने विधानसभा में स्पष्ट आदेश देते हुए ई-फसल पंजीयन नहीं होने पर भी किसानों के धान खरीदी करने के निर्देष दिए थे। इसके मद्देनजर आदिवासी विविध कार्यकारी सहकारी संस्थाओं ने अनेक किसानों से धान खरीदी किए, लेकिन धान बिक्री के बावजूद अनेक किसानों के धान की राशि अब भी प्रलंबित है। जिससे किसान चिंता में है।

फसल कर्ज देने में टालमटोल

धान बेचने पर भी राशि नहीं मिली वहीं अब ई-फसल पंजीयन नहीं होने का कारण पेश करते हुए अनेक बैंक द्वारा फसल कर्ज देने में टालमटोल किया जा रहा है। ई-फसल पंजीयन नहीं होने पर फसल कर्ज मंजूर नहीं होगा," ऐसी भूमिका कुछ बैंकों ने लेने से किसानों में चिता का वातावरण है।

खरीफ सीजन आगामी कुछ दिनों में शुरू होनेवाला है, ऐसे में किसानों के समक्ष बीज, खाद, किटनाशक, मशागत खर्च तथा मजदूरी के लिए निधि जुटाने का बडा संकट निर्माण हुआ है। पहले ही किसान आर्थिक दिक्कतों में होनेवाले किसानों को चान की राशि नहीं मिले, ऐसे में फसल कर्ज नकारे जाने का भय निर्माण होने से ग्रामीण अंचल में रोष व्यक्त किया जा रहा है।

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