

Gadchiroli Industrial Development: खनिज संपदा से समृद्ध गड़चिरोली के औद्योगिक विकासको अब हरित तकनीक का साथ मिलने जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार और जॉन कॉकरिल इंडिया लिमिटेड के बीच गड़चिरोली में हरित लौह व हरित इस्पात तकनीक पर आधारित पायलट और प्रदर्शन प्रकल्प स्थापित करने के लिए समझौता हुआ है।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में शुक्रवार को मुंबई में इस समझौते का औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। समझौते का मुख्य उद्देश्य इस्पात उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जनको कम करने वाली उन्नत तकनीक की उपयोगिता का अध्ययन करना है।
गड़चिरोली में इस तकनीक का प्रदर्शन और मूल्यांकन किया जाएगा। इसके माध्यम से भविष्य में जिले को हरित इस्पात उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। इसके लिए राज्य की संबंधित संस्थाओं और उद्योग जगत के साथ ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीक हस्तांतरण तथा स्थानीय मानव संसाधन के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।
अक्षय ऊर्जा से लौह उत्पादन की तकनीकः जॉन कॉकरिल की हरित इस्पात तकनीक में 'वोल्टेरॉन' विशेष रूप से उल्लेखनीय अवधारणा है। कम तापमान वाले इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर लौह अयस्क से लोहा प्राप्त करना इस तकनीक की प्रमुख विशेषता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक लौह-उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले कोयले और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना है।
गड़चिरोली के लिए इस समझौते का महत्व केवल एक औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं है। इसे खनिज संपदा आधारित उद्योगों, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और निर्यात योग्य उत्पादों पर आधारित नई औद्योगिक पारिस्थितिकी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रकल्प के लिए आवश्यक मंजूरियां, अनुमति तथा नीतिगत सुविधाएं उपलब्ध कराने में राज्य सरकार सहयोग करेगी।
इससे जिले में भविष्य में हरित तकनीक आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस चरण में प्रकल्प के लिए निश्चित निवेश, उत्पादन क्षमता, रोजगार सृजन अथवा वास्तविक उत्पादन शुरू होने की तारीख की घोषणा नहीं की गई है, इसलिए फिलहाल इस समझौते को गड़चिरोली को भविष्य में हरित इस्पात उत्पादन का केंद्र बनाने की दिशा में की गई प्रारंभिक नींव के रूप में देखा जा रहा है।