

Ghanta Gaadi Tax Dhule News: धुले शहर के नागरिकों के लिए नया वित्तीय वर्ष बड़ी आर्थिक चुनौतियां लेकर आया है। पहले से ही बढ़ी हुई आवास टैक्स (घरपट्टी) के बोझ से कराह रही जनता पर धुले महानगरपालिका ने 'घंटागाड़ी कर' के नाम पर एक और वार कर दिया है। चालू वित्तीय वर्ष के प्रॉपर्टी टैक्स बिलों में सालाना 600 रुपये (50 रुपये प्रति माह) का नया शुल्क जोड़ दिया गया है। आयुक्त की मंजूरी से लागू इस फैसले ने शहर के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
आवास टैक्स में हुई भारी वृद्धि का मुद्दा पिछले कई वर्षों से धुले की राजनीति के केंद्र में रहा है। पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक अनूप अग्रवाल ने जनता से बार-बार वादा किया था कि वे इस बढ़ी हुई कर दर को कम कराएंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि न तो घरपट्टी कम हुई और न ही प्रशासन ने कोई रियायत दी। अब इसमें घंटागाड़ी शुल्क जुड़ जाने से विधायक के दावों की साख पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के आश्वासन केवल कागजी और 'हवा-हवाई' साबित हुए हैं।
संपत्तियों के मापन का काम अमरावती की एक निजी एजेंसी को सौंपा गया था, जिसकी कार्यप्रणाली अब विवादों के घेरे में है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एजेंसी ने बिना मौके पर पहुंचे या गलत मापांकन के आधार पर प्रॉपर्टी का आकलन किया है, जिससे लोगों के पास भारी-भरकम और गलत बिल पहुंच रहे हैं।
इतना ही नहीं, जिन जागरूक नागरिकों ने अपने घरों में सोलर पैनल लगाए हैं, उन्हें नियमों के अनुसार मिलने वाली कर छूट भी बिलों में नहीं दिखाई दे रही है। शिकायतों के समाधान के लिए बुलाई गई 'जनसुनवाई' भी महज एक प्रशासनिक औपचारिकता साबित हुई, जहाँ निर्णय लेने वाले वरिष्ठ अधिकारी नदारद रहे।
धुले महानगरपालिका के वसूली विभाग प्रमुख मुकुंद अग्रवाल के अनुसार, यह कर तत्कालीन आयुक्त अमिता दगड़े-पाटिल द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव की मंजूरी के बाद नियमानुसार लागू किया गया है। दूसरी ओर, जनता का तर्क है कि जब कचरा संकलन का ठेका पहले ही ऊंची दरों पर दिया जा चुका है, तो नागरिकों से अतिरिक्त वसूली क्यों की जा रही है? शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था आज भी ठप है। आक्रोशित नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि बिलों की त्रुटियां सुधारकर यह अतिरिक्त कर वापस नहीं लिया गया, तो पूरे शहर में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।