धुले में डबल मर्डर से सनसनी! ढोंगी तांत्रिक ने आश्रम में कर दी युवक-युवती की हत्या, अघोरी वारदात से मचा हड़कंप

Dhule Crime News: महाराष्ट्र के धुले में अंधविश्वास का खूनी खेल। नवनाथ पंथ के नाम पर फर्जी आश्रम चलाने वाले ढोंगी बाबा ने दो मित्रों की अघोरी तरीके से हत्या कर दी। इलाके में दहशत का माहौल।
Dhule Double Murder Case
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
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Dhule Double Murder Case: नासिक के भाेंदूबाबा अशोक खरात और सोलापुर के मनोहर मामा जैसे ढोंगी बाबाओं के मामलों के बीच अब धुले जिले की साक्री तहसील से अंधविश्वास से जुड़ी एक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां एक ढोंगी बाबा के आश्रम में शनि अमावस्या की रात पूजा के लिए गए युवक और युवती की बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटनास्थल पर मिले एक रुमाल के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और कुछ ही घंटों में उसे गिरफ्तार कर लिया।

धुले पुलिस के मुताबिक पूजा विधि के बाद हुए विवाद के चलते इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया। मृत युवती के चाचा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। आरोपी का नाम योगेश उर्फ भैय्या बापू खैरनार बताया गया है। मृतकों की पहचान जयश्री काकुस्ते और अक्षय सोनवणे के रूप में हुई है। दोनों आपस में मित्र थे।

सड़क किनारे मिला युवती का शव

शनिवार सुबह धुले जिले की साक्री तहसील के निजामपुर इलाके में रायपुर-भडगांव मार्ग पर एक युवती का शव मिला। युवती का मुंह रुमाल से बांधा गया था और उसके ऊपर एक मोटरसाइकिल डाली गई थी। जांच में शव की पहचान जयश्री काकुस्ते के रूप में हुई। पुलिस जांच के दौरान जयश्री के चाचा संजय हिरे ने शिकायत दर्ज कराई कि जयश्री और अक्षय पूजा के लिए कथित बाबा योगेश खैरनार के पास गए थे। वहीं पूजा के बाद विवाद हुआ। आरोप है कि योगेश ने लोहे की वस्तु से अक्षय के सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी, जबकि जयश्री का दुपट्टे से गला घोटकर कत्ल किया गया। मिली जानकारी के अनुसार जयश्री एक फाइनेंस कंपनी में काम करती थी, जबकि अक्षय ग्राम पंचायत में चपरासी था। शुरुआत में आरोपी योगेश ने पुलिस को गुमराह किया। उसने दावा किया कि कोई अन्य जयश्री की हत्या कर रहा था और उसे बचाने के दौरान अक्षय की मौत हो गई।

साक्षात्कार के नाम पर अघोरी पूजा का ढोंग

धुले पुलिस के अनुसार, खुद को नवनाथ पंथ का अनुयायी बताने वाला योगेश खैरनार पिछले 5 वर्षों से साक्री तालुका के उभरांडी क्षेत्र में फर्जी आश्रम चला रहा था। वह हर गुरुवार दरबार लगाकर लोगों की घरेलू और आर्थिक समस्याओं का समाधान करने का दावा करता था। हवन, भविष्यवाणी और चमत्कारों के नाम पर वह लोगों को अपने जाल में फंसाता था। अघोरी विद्या और तांत्रिक शक्तियों का डर और भ्रम पैदा कर उसने इलाके के कई लोगों को प्रभावित किया था।

केसरिया रुमाल बना गिरफ्तारी का सुराग

जिस स्थान पर जयश्री का शव मिला, वहां पुलिस को एक केसरिया रुमाल मिला। श्वान दस्ते की मदद से पुलिस सीधे आरोपी के आश्रम तक पहुंची। पूछताछ में सख्ती बरतने पर योगेश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि अक्षय का शव आश्रम के पास दफनाया गया है। इसके बाद पुलिस ने वहां से शव बरामद कर लिया।

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