विदर्भ से धाराशिव पहुंचा बाघ, येदशी रामलिंग घाट अभयारण्य आने तय किया 450 KM का सफर

Tiger News: विदर्भ से 450 किमी चलकर एक नर बाघ महाराष्ट्र के धाराशिव जिले स्थित येदशी रामलिंग घाट अभयारण्य पहुंचा। तीन साल का यह बाघ पहले टिपेश्वर में दिखा था और अब ‘रामलिंग’ नाम से पहचाना जा रहा है।
Tiger travelled 450 kms to settle in Yedashi Ramling Ghat Sanctuary
बाघ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Yedashi Ramling Ghat Sanctuary News: विदर्भ से 450 किलोमीटर चलकर एक नर बाघ येदशी रामलिंग घाट वन्यजीव अभयारण्य में अपनी रिहाइश बनाने के लिए पहुंचा है। यह अभयारण्य महाराष्ट्र के धाराशिव जिले का एक छोटा सा जंगल है, जहां दशकों से किसी बड़े बाघ को नहीं देखा गया।

एक वन अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि करीब तीन साल की उम्र का यह बाघ पिछले साल दिसंबर में विदर्भ के टिपेश्वर से लंबी यात्रा करके छोटे अभयारण्य क्षेत्र में पहुंचा था।

रेंज वन अधिकारी अमोल मुंडे ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि 22.50 वर्ग किलोमीटर में फैले येदशी रामलिंग को 1997 में एक अभयारण्य के रूप में विकसित किया गया था और यहां तेंदुए, भालू, सियार, भेड़िये, हिरण और खरगोश के अलावा 100 प्रजाति के पशु-पक्षी मिलते हैं।

पिछले साल पहली बार देखा गया था बाघ

रेंज वन अधिकारी अमोल मुंडे ने बताया कि स्थानीय स्तर पर वन कर्मचारी बाघ को 'रामलिंग' नाम से पुकारते हैं और उन्होंने इसका नाम पास में स्थित भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर के नाम पर रखा है। उन्होंने कहा कि बाघ को पहली बार पिछले साल दिसंबर में देखा गया था।

वन्यजीव विशेषज्ञों ने मामले का अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला कि वह यवतमाल के टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य से आया है। येदशी में ली गई कैमरा ट्रैप तस्वीरों का मिलान टिपेश्वर से पहले ली गई तस्वीरों से किया गया, जिससे जानवर की पहचान और मूल स्थान की पुष्टि हुई।

मुंडे ने कहा कि हमारा येदशी रामलिंग घाट वन्यजीव अभयारण्य छोटा है, जो 22.50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह बाघ बार्शी, भूम, तुलजापुर और धाराशिव तालुकाओं में विचरण करता है। हालांकि, इसने अभी तक किसी भी इंसान पर हमला नहीं किया है। अधिकारी ने बताया कि यह बाघ 1971 के बाद से मराठवाड़ा में आने वाला चौथा बाघ है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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