

Sambhajinagar Economic Growth: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सन्याल ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास गति को तेज करने के लिए बड़े संरचनात्मक सुधारों के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार आवश्यक है।
केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटल स्वरूप दे देना सुधार नहीं है। वास्तविक सुधार तब होगा, जब प्रक्रियाओं में मौजूद अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए और पूरी व्यवस्था को सरल, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जाए। इससे उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ नागरिकों का जीवन भी आसान होगा।
सीएमआईए और छत्रपति संभाजीनगर फर्स्ट की ओर से आयोजित 'भारत में व्यवसाय सुलभता के लिए प्रक्रिया सुधार' विषयक विशेष सत्र में सन्याल ने कहा कि प्रशासन में आने वाली अधिकांश कठिनाइयां कुछ चुनिंदा प्रक्रियाओं में केंद्रित होती हैं। इसलिए प्रत्येक प्रक्रिया में एक साथ बदलाव करने के बजाय प्रमुख अड़चनों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुधार करना अधिक प्रभावी होगा।
उन्होंने इसके लिए 80:20 सिद्धांत अपनाने की सलाह दी। सन्याल ने कहा कि किसी भी प्रक्रिया में सुधार करने से पहले उसकी पूरी कार्यप्रणाली को समझना जरूरी है। इसके बाद अड़चनों की पहचान कर आवश्यक बदलाव लागू किए जाएं और उनके परिणामों की लगातार समीक्षा की जाए।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक चरण, बार-बार मांगे जाने वाले दस्तावेज, विभागों के बीच समन्वय की कमी तथा पुराने और अप्रासंगिक नियम कारोबार के लिए बड़ी बाधा बनते हैं। इन्हें दूर किए बिना केवल तकनीक के माध्यम से व्यवस्था को बेहतर नहीं बनाया जा सकता।
सन्याल ने स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल व्यवस्था को सरल बनाने के बाद किया जाना चाहिए। यदि किसी जटिल और पुरानी प्रक्रिया को उसी रूप में कंप्यूटरीकृत कर दिया जाए तो नागरिकों और कारोबारियों की परेशानी कम होने के बजाय कई बार वही समस्या नए रूप में सामने आती है। इसलिए पहले प्रक्रिया को सरल और कार्यकुशल बनाया जाए और उसके बाद तकनीक का उपयोग किया जाए।
छत्रपति संभाजीनगर में पर्यटन विकास की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए सन्याल ने कहा कि शहर को पर्यटन के क्षेत्र में दूसरे शहरों की नकल करने के बजाय अपनी विशिष्ट पहचान और अपना मॉडल विकसित करना चाहिए।
यहां आने वाले पर्यटक अधिक समय तक ठहरें, इसके लिए पर्यटन स्थलों के साथ सुविधाओं, परिवहन, आवास और मनोरंजन के बेहतर विकल्प विकसित करना आवश्यक है। पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ने से स्थानीय व्यापार, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
मंत्री अतुल सावे ने छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। महापौर समीर राजूरकर ने स्थानीय निकाय के माध्यम से शहर के विकास के लिए किए जा रहे विभिन्न उपक्रमों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. भागवत कराड, विधायक प्रशांत बंब और विधायक अनुराधा चव्हाण सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यमी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
सीएमआईए के अध्यक्ष अथर्वेशराज नंदावत ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर के गौरवशाली ऐतिहासिक वारसे और आधुनिक औद्योगिक क्षमता को एक साथ जोड़कर शहर को भविष्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे, विद्युत वाहन उद्योग, उन्नत विनिर्माण, ड्रोन उद्योग और भविष्य के विकास केंद्र के रूप में शहर की संभावनाओं का उल्लेख किया।
छत्रपति संभाजीनगर फर्स्ट के अध्यक्ष रितेश मिश्रा ने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ शहर का सर्वांगीण और नागरिक केंद्रित विकास भी जरूरी है। स्वच्छ एवं हरित शहर, आधुनिक परिवहन, शिक्षा, खेल, पर्यटन और शहर की पहचान मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मजबूत आधारभूत सुविधाओं और बड़े आयोजनों के लिए आधुनिक सम्मेलन केंद्र की आवश्यकता जताई। मिश्रा ने वर्ष 2047 तक छत्रपति संभाजीनगर को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल करने, विद्युत वाहन उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने और विरासत पर्यटन का प्रवेशद्वार विकसित करने का लक्ष्य व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन मिहिर सौन्दलगेकर और सौरभ चलानी ने किया। प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन मानद सचिव अजिंक्य सावे और निलेश मित्तल ने किया। कार्यक्रम में शहर के बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।