

Cyber Fraudsters Target Company Owners: कारोबारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाने के लिए साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया है। अब ठग किसी अनजान व्यक्ति के नाम से ही नहीं, बल्कि कंपनी के मालिक, वरिष्ठ अधिकारी या वित्तीय विभाग के जिम्मेदार व्यक्ति बनकर कर्मचारियों को संदेश भेज रहे हैं।
संदेश में ‘तुरंत भुगतान करें’, ‘बहुत जरूरी है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर कर्मचारी पर दबाव बनाया जाता है। इसके बाद आरटीजीएस या ऑनलाइन माध्यम से लाखों रुपये किसी खाते में भेजने को कहा जाता है।
जल्दबाजी में बिना पुष्टि किए गया एक भुगतान कारोबारी के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान बन सकता है। छत्रपति संभाजीनगर शहर पुलिस ने उद्योगपतियों, व्यापारियों और कंपनियों के कर्मचारियों को इस साइबर ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी है।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी सबसे पहले उद्योगपतियों और कारोबारियों के ई-मेल, व्हाट्सऐप या मोबाइल को निशाना बनाते हैं। किसी खाते तक पहुंच मिलने के बाद अपराधी कंपनी से संबंधित संपर्क, अधिकारियों के मोबाइल नंबर और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी हासिल कर लेते हैं।
इसी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए वे कंपनी के मालिक या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से कर्मचारी को भुगतान का संदेश भेजते हैं। संदेश इस तरह तैयार किया जाता है कि कर्मचारी को किसी प्रकार का संदेह न हो। कई बार कंपनी के भीतर चल रहे कामकाज और संबंधित लोगों की जानकारी का इस्तेमाल भी संदेश को विश्वसनीय बनाने के लिए किया जाता है।
साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी चाल कर्मचारी को सोचने का मौका नहीं देना है। संदेश में तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है। कर्मचारी को बताया जाता है कि रकम अभी भेजना जरूरी है और देरी होने पर महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो सकता है।
ऐसे समय में कर्मचारी यदि संदेश को सही मानकर भुगतान कर देता है तो रकम सीधे ठगों के खाते में पहुंच सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सऐप, संदेश या ई-मेल के आधार पर किसी भी बड़े भुगतान का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
यदि कंपनी के मालिक, संचालक या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक भुगतान का आदेश आता है तो कर्मचारी को उसी संदेश का जवाब देने के बजाय संबंधित अधिकारी के पुराने और अधिकृत मोबाइल नंबर पर सीधे फोन करना चाहिए। फोन पर पुष्टि होने के बाद ही भुगतान किया जाए।
पुलिस ने कंपनियों को महत्वपूर्ण भुगतानों के लिए दोहरी मंजूरी की व्यवस्था अपनाने की सलाह दी है। बड़ी रकम के लेनदेन में लिखित मंजूरी और स्वतंत्र रूप से पुष्टि की व्यवस्था होने से साइबर ठगी का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
किसी कारोबारी संस्था को भुगतान के लिए नया बैंक खाता क्रमांक भेजा जाए तो भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अपराधी कंपनी के परिचित व्यक्ति या अधिकारी बनकर नया खाता भेज सकते हैं। ऐसे किसी भी बदलाव की पुष्टि कंपनी के पहले से उपलब्ध अधिकृत संपर्क माध्यम से की जानी चाहिए।
पुलिस ने कहा है कि बैंक खाते की जानकारी में बदलाव संबंधी संदेश मिलने पर संदेश में दिए गए नए मोबाइल नंबर पर फोन करने के बजाय संबंधित अधिकारी के पुराने और विश्वसनीय नंबर पर संपर्क करें।
पुलिस ने कारोबारियों को अनजान व्यक्ति से प्राप्त एपीके या अन्य संदिग्ध फाइल मोबाइल में स्थापित नहीं करने की सलाह दी है। ऐसी फाइल के माध्यम से मोबाइल या खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अपराधियों तक पहुंच सकती है।
व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या किसी अन्य माध्यम से भुगतान के संबंध में आए संदेशों को भी बिना जांचे आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। विशेष रूप से ऐसे संदेश, जिनमें तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बनाया गया हो, उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस ने कारोबारियों और उद्योगपतियों से ई-मेल तथा व्हाट्सऐप पर दो-चरणीय सत्यापन सुविधा सक्रिय रखने की अपील की है। कंपनी के कर्मचारियों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में नियमित रूप से जानकारी देने और बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए स्पष्ट नियम बनाने की भी सलाह दी गई है।
यदि किसी कारोबारी के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने और वापस हासिल करने की कार्रवाई शुरू करने में मदद मिल सकती है।
पुलिस की साफ सलाह है कि संदेश कितना भी जरूरी क्यों न लगे, भुगतान से पहले फोन पर पुष्टि जरूर करें। जल्दबाजी साइबर ठगों का हथियार है और सावधानी ही कारोबारियों की सबसे बड़ी सुरक्षा है।