अब AI बताएगा कौन कर रहा बिजली चोरी; महावितरण ने छत्रपति संभाजीनगर में पकड़े 28 हजार के करीब मामले हुए उजागर

AI Electricity Theft Detection: छत्रपति संभाजीनगर में महावितरण के AI और मशीन लर्निंग मॉड्यूल से जून-अगस्त में 27,964 बिजली चोरी के मामले पकड़े गए। 24,508 मामलों में 66.28 करोड़ की चोरी का आकलन हुआ।
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लोकेश चंद्र (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, महावितरण)(सोर्स: सोशल मीडिया)
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AI Electricity Theft Detection In Sambhajinagar: बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए महावितरण ने अब तकनीक का सहारा लिया है। बिजली चोरी की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और मशीन लर्निंग आधारित मॉड्यूल तैयार किया गया है।

यह मॉड्यूल बिजली उपभोग से जुड़े आंकड़ों का लगातार विश्लेषण कर संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान करता है। इसके आधार पर विशेष जांच दल संबंधित स्थानों पर पहुंचकर बिजली चोरी की जांच करते हैं।

महावितरण की इस नई व्यवस्था के तहत जून से अगस्त के बीच राज्य के चार क्षेत्रीय विभागों में 27 हजार 964 बिजली चोरी के मामले उजागर हुए हैं। जांच के बाद 24 हजार 508 मामलों में 66 करोड़ 28 लाख रुपये की बिजली चोरी का आकलन किया गया है।

50 से अधिक मानकों का विश्लेषण

महावितरण का एआई मॉड्यूल उपभोक्ताओं के पुराने बिजली उपयोग के आंकड़ों का अध्ययन करता है। इसके साथ ही अचानक बिजली खपत में कमी या वृद्धि, मीटर में संभावित तकनीकी छेड़छाड़ और बिजली उपयोग के पैटर्न में होने वाले असामान्य बदलावों पर भी नजर रखता है।

ऐसे 50 से अधिक तकनीकी मानकों का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि किसी उपभोक्ता के बिजली उपयोग में संदिग्ध बदलाव मिलता है तो एआई मॉड्यूल उस कनेक्शन को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में डाल देता है।

इसके बाद संबंधित स्थान की जांच के लिए विशेष दल को भेजा जाता है। इससे बिना किसी ठोस आधार के बड़े पैमाने पर जांच करने के बजाय संदिग्ध कनेक्शनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

190 से अधिक विशेष दल सक्रिय

बिजली चोरी के खिलाफ महावितरण ने राज्यभर में 190 से अधिक विशेष जांच दल तैनात किए हैं। इन दलों को एआई मॉड्यूल से मिलने वाली जानकारी के आधार पर कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। जांच प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है।

इसके लिए ‘थेफ्ट ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ विकसित किया गया है। इसके माध्यम से बिजली चोरी की सूचना मिलने से लेकर स्थल निरीक्षण, जांच, डिजिटल पंचनामा, मौके के फोटो, बिजली आपूर्ति खंडित करने और दंडात्मक बिल की वसूली तक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है।

इसके लिए एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। कार्रवाई से संबंधित जानकारी वास्तविक समय में अपडेट होने से वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने में सुविधा मिल रही है।

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कोकण में सबसे अधिक बिजली चोरी

जून से अगस्त के तीन महीनों में छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्रीय विभाग में 5,083 बिजली चोरी के मामले सामने आए। कोकण क्षेत्र में सबसे अधिक 11,083 मामले पकड़े गए। नागपुर क्षेत्र में 5,949 और पुणे क्षेत्रीय विभाग में 5,849 बिजली चोरी के मामले उजागर हुए। चारों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 27,964 मामले सामने आए।

इनमें से 24,508 मामलों के मूल्यांकन में 66 करोड़ 28 लाख रुपये की बिजली चोरी का पता चला। संबंधित उपभोक्ताओं को बिजली चोरी की राशि के बिल जारी किए गए। अब तक 10,810 मामलों में 29 करोड़ 85 लाख रुपये की राशि जमा की जा चुकी है।

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राशि जमा नहीं की तो केस

महावितरण के अनुसार बिजली चोरी की राशि और निर्धारित समझौता शुल्क समय सीमा में जमा नहीं करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा रही है। अब तक 289 मामलों में विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

बिजली चोरी के मामले में तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने कहा कि अगले तीन वर्षों में तकनीकी और वाणिज्यिक हानि को 10 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए बिजली बिलों की बकाया राशि की वसूली के साथ बिजली चोरी के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। एआई आधारित मॉड्यूल से बिजली चोरी की पहचान अधिक सटीक और कार्रवाई अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।

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