

Marathwada Water Scarcity Action Plan: छत्रपति संभाजीनगर मानसून के बीच बारिश का दौर कमजोर पड़ने से मराठवाड़ा में एक बार फिर जल संकट की आशंका बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सितंबर का इंतजार किए बिना अगस्त में ही टंचाई कृती प्रारूप यानी जलसंकट कार्ययोजना तैयार करने का फैसला किया है। विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने संभाग के सभी जिलाधिकारियों को तत्काल कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस वर्ष मानसून की शुरुआत देरी से हुई थी। जून और जुलाई के शुरुआती दौर में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में पेयजल संकट पैदा हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मराठवाड़ा में 413 टैंकरों के जरिए लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना पड़ा था।
जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश से जलस्रोतों में कुछ सुधार आया और टैंकरों की संख्या घटकर 96 तक पहुंच गई। हालांकि, अगस्त के दूसरे सप्ताह से बारिश का दौर फिर कमजोर पड़ गया। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पर पड़ा और टैंकरों की संख्या दोबारा बढ़कर 181 हो गई।
छत्रपति संभाजीनगर जिला प्रशासन के अनुसार, नांदेड, हिंगोली, लातूर और परभणी जिले फिलहाल टैंकरमुक्त हैं। हालांकि इन जिलों में भी अपेक्षित बारिश नहीं होने से प्रशासन पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यहां भी पेयजल संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका है।
अन्य जिलों में पहले से ही जल संकट की संभावना को देखते हुए अधिकारियों को आवश्यक उपायों की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्ययोजना में संभावित प्रभावित क्षेत्रों, वैकल्पिक जलस्रोतों और टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया जाएगा।
जायकवाड़ी को छोड़कर संभाग के अधिकांश बांधों में फिलहाल पर्याप्त जलसंचय नहीं है। ऐसे में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने जलस्रोतों से होने वाली अनधिकृत पानी निकासी पर रोक लगाने के लिए विशेष दल गठित कर निगरानी बढ़ाने को कहा है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सामान्य परिस्थितियों में जलसंकट कार्ययोजना सितंबर में तैयार की जाती है। लेकिन इस वर्ष बारिश की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एक महीने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। इससे संभावित जल संकट से निपटने के लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।