मराठवाड़ा में मानसून के बीच जल संकट, 74 तहसीलें सूखाग्रस्त, 160 गांवों में 277 टैंकरों से जलापूर्ति शुरू

Marathwada Water Crisis: मराठवाड़ा की 74 तहसीलों में सूखा घोषित होने के बाद पानी का संकट गहराया। 160 गांवों में 277 टैंकरों से आपूर्ति जारी है, जबकि किसान फसल बचाने को पानी खरीदने को मजबूर हैं।
Water crisis in Marathwada amidst monsoon: 74 tehsils drought-hit
मराठवाड़ा जल संकट सोर्स- सोशल मीडिया
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Marathwada Water Crisis Tanker Supply Drought: मानसून अभी पूरी तरह विदा भी नहीं हुआ है, लेकिन सूखा प्रभावित मराठवाड़ा के कई हिस्सों में पानी का संकट गहराने लगा है। क्षेत्र की 76 में से 74 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। इन इलाकों के 160 गांवों में 277 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।

स्थानीय कुएं और जलस्रोत सूखने के कारण अब और भी गांव टैंकरों से पानी की मांग करने लगे हैं। प्रशासन का कहना है कि पैठण के पास स्थित जायकवाड़ी बांध सहित प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध पानी पीने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त रहेगा।

हालांकि, गांवों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। कुएं और स्थानीय जलस्रोत सूखने लगे हैं। कई किसान फसलों और मवेशियों को बचाने के लिए प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च कर पानी खरीद रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर के सिद्धनाथ वडगांव के किसान सचिन बिलवाल भी एक महीने से अधिक समय से टैंकर का पानी खरीद रहे हैं। यह पानी मुख्य रूप से उनके परिवार और तीन मवेशियों के लिए इस्तेमाल होता है।

एक टैंकर के लिए उन्हें 1,000 रुपये देने पड़ते हैं, जो करीब एक सप्ताह तक चलता है। बिलवाल ने कहा कि हर टैंकर के लिए 1,000 रुपये देने पड़ते हैं और यह एक सप्ताह चलता है।हमने ग्रामसभा से सरकार से टैंकर की मांग करने को कहा है। उम्मीद है कि जल्द व्यवस्था हो जाएगी लेकिन मानसून खत्म होने से पहले ही कई गांव इसी तरह की स्थिति में हैं।

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फसल बचाने के लिए रोज 3,000 रुपये खर्च

छत्रपति संभाजीनगर के शाहापुर निवासी 40 वर्षीय किसान बद्रीनाथ भरत अपनी अदरक की फसल बचाने के लिए रोजाना 3,000 रुपये खर्च कर 2 टैंकर पानी मंगवा रहे हैं। इसी पानी का इस्तेमाल उनके परिवार और 10 मवेशियों के लिए भी किया जा रहा है।

भरत ने बताया कि मैंने कपास और मक्का की पूरी फसल खो दी है। हमारे पास कुआ है लेकिन वह सूख गया है। पिछले 15 दिनों से टैंकर के पानी पर निर्भर हूं। एक महीने तक किसी तरह खर्च कर सकता हूं, इस उम्मीद में कि कुछ उत्पादन मिल जाए। इसके बाद मैं इसे जारी नहीं रख पाऊंगा। भरत ने टमाटर, कंपास और मक्का समेत कई फसलें बोई थीं।

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सामान्य से 38% कम वर्षा

मराठवाड़ा जिले में इस वर्ष मानसून कमजोर रहा है। महाराष्ट्र में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जबकि मराठवाड़ा में बारिश की कमी 38 फीसदी रही। कुछ जिलों में स्थिति और खराब रही। लातूर में सामान्य से 48 फीसदी और परभणी में 43 फीसदी कम बारिश हुई। जल संकट का असर टैंकरों की बढ़ती संख्या से भी स्पष्ट है।

छत्रपति संभाजीनगर के 77 गांवों में 120 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। वहीं बीड के 65 गांवों में 127 टैंकर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। जालना में भी गांवों में पानी पहुंचाने के लिए 22 टैंकर लगाए गए है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के बाद राहत उपायों की घोषणा की है।

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