

Chhatrapati Sambhajinagar Sub Registrar Suspended: छत्रपति संभाजीनगर जिले में कथित फर्जी रजिस्ट्री, नियमों के विरुद्ध दस्त पंजीकरण और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की शिकायतों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। सोयगांव के प्रभारी उप निबंधक दीपक रावलकर के खिलाफ मिली शिकायतों पर जिले के सांसद संदिपान भुमरे ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए।
सांसद संदिपान भुमरे ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने को कहा है। साथ ही जिले के सभी उप निबंधक कार्यालयों के कामकाज की गहन छानबीन कर संदिग्ध लेनदेन और नियमों के उल्लंघन का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर कार्यालय में शुक्रवार को जिलाधिकारी विनय गौड़ा की उपस्थिति में जिले के सभी उप निबंधक कार्यालयों के कामकाज की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में उपजिलाधिकारी संगीता राठोड़, पंजीयन विभाग के उप महानिरीक्षक सहित जिले के सभी उप निबंधक मौजूद रहे। इस दौरान सांसद संदिपान भूमरे ने अधिकारियों से केवल आंकड़े नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन और शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई का भी जवाब मांगा।
बैठक में सोयगांव के प्रभारी उप निबंधक दीपक रावलकर द्वारा कथित रूप से नियमों और कानूनों की अनदेखी कर सैकड़ों दस्त पंजीकृत किए जाने की शिकायत सामने आई। भूमरे ने सवाल उठाया कि मामला इतना गंभीर होने के बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं केवल जांच के नाम पर मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।
भुमरे ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया।
बैठक में जानकारी सामने आई कि छत्रपति संभाजीनगर जिले में फर्जी रजिस्ट्री से जुड़े 11 से अधिक मामलों में अब तक अपराध दर्ज किए जा चुके हैं। भूमरे ने इस पर भी गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इन मामलों में दस्त तैयार करने वाले और दस्त प्रस्तुत करने वाले लोगों पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन जिस दस्त का आधिकारिक पंजीकरण उप निबंधक कार्यालय में हुआ, उस अधिकारी की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यदि कोई दस्त फर्जी या नियम विरुद्ध है, तो उसके पंजीकरण की जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। केवल दस्त लिखने और लिखवाने वालों पर कार्रवाई करने से पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय नहीं होगी।
भूमरे ने जिले के सभी उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत दस्तों की गहन जांच के निर्देश दिए। विशेष रूप से तुकड़ेबंदी कानून का उल्लंघन कर पंजीकृत किए गए दस्त, नागरिकों की शिकायतों से जुड़े मामले, संदिग्ध लेनदेन, नियमविरुद्ध पंजीकरण, कम मूल्यांकन और स्टांप शुल्क में अंतर वाले मामलों की जानकारी मांगी गई है।
इसके साथ ही ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई, कितने मामलों की दोबारा जांच हुई, कितनी राशि सरकारी खजाने में वसूल की गई और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए, इसका विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
सांसद संदिपान भुमरे ने जिले के प्रत्येक उप निबंधक कार्यालय से पिछले और वर्तमान वित्तीय वर्ष का वर्षवार तथा कार्यालयवार आंकड़ा भी मांगा है। इसमें कितने दस्त पंजीकृत हुए, उससे सरकार को कितनी आय हुई और पिछले वर्ष की तुलना में पंजीकरण में कितना बदलाव आया, इसका पूरा विवरण शामिल होगा।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी जांचने के निर्देश दिए कि कहीं किसी कार्यालय में अचानक दस्त पंजीकरण की संख्या तो नहीं बढ़ी। कम मूल्यांकन के कारण सरकारी राजस्व का नुकसान तो नहीं हुआ। स्टांप शुल्क में कोई अनियमितता तो नहीं हुई और संदिग्ध लेन-देन के मामलों में अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
भुमरे ने स्पष्ट किया कि फर्जी रजिस्ट्री, नियमों के विरुद्ध दस्त पंजीकरण अथवा सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के किसी भी मामले में अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने सभी उप निबंधक कार्यालयों के कामकाज की व्यापक समीक्षा कर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय करने और कठोर कार्रवाई करने की मांग की।
बैठक के बाद अब पूरे जिले के उप निबंधक कार्यालयों के पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड की जांच पर निगाहें टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो आने वाले दिनों में पंजीयन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।