Loan Fraud: छत्रपति संभाजीनगर में 7 करोड़ के कर्ज का सपना दिखाकर 1.09 करोड़ ठगे, 8 आरोपियों पर केस

Sambhajinagar Loan Fraud Case: छत्रपति संभाजीनगर में 7 करोड़ रुपये का कर्ज दिलाने के नाम पर कारोबारी से 1.09 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया। पुलिस ने 8 आरोपियों पर केस दर्ज किया।
Chhatrapati Sambhajinagar Loan Fraud
कारोबारी से करोड़ों की ठगी(सोर्स: AI)
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Chhatrapati Sambhajinagar Loan Fraud: कारोबार के लिए 15 दिन में 7 करोड़ रुपये का कर्ज दिलाने का झांसा देकर एक कारोबारी से 1 करोड़ 9 लाख 85 हजार 100 रुपये ठग लिए गए।

आरोपियों ने दिल्ली की यूनाइटेड वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज वित्तीय कंपनी के नाम पर कर्ज दिलाने की प्रक्रिया शुरू की और लॉगिन शुल्क, परियोजना रिपोर्ट, लेखाकार शुल्क, बीमा, कमीशन तथा वस्तु एवं सेवा कर के नाम पर लगातार रकम वसूली।

इतना ही नहीं, कारोबारी से 84 पुनर्भुगतान चेक, दो हस्ताक्षर किए हुए चेक तथा कोरे कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान भी लिए गए। कर्ज की रकम नहीं मिलने पर पीड़ित ने सिडको पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

इतने लोंगो ने की शिकायत

इस मामले में धर्मेंद्र विनोदानंद झा, हरजीत सिंह रूपराह, आरव अग्रवाल, अशोक सिंघल, दीपक अरोड़ा, मोहिनी धर्मेंद्र झा, गणेश देशमुख और अमृता गणेश देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह घटना 13 अगस्त 2025 से 4 अप्रैल 2026 के बीच टेलीविजन सेंटर क्षेत्र स्थित स्वान इंटरप्राइजेस में होने का आरोप है।

शिकायतकर्ता प्रकाश नारायणराव रोहिणीकर (60) हर्सूल क्षेत्र के मोरया पार्क निवासी हैं। वह वर्ष 1988 से डिजाइन और छपाई का व्यवसाय करते हैं। जुलाई 2025 में गणेश देशमुख ने उनकी धर्मेंद्र झा से पहचान कराई।

झा ने दिल्ली की वित्तीय कंपनी के माध्यम से 7 करोड़ रुपये का कर्ज दिलाने का भरोसा दिया। 4 अगस्त को रोहिणीकर को दिल्ली के तीस हजारी न्यायालय परिसर स्थित कार्यालय में ले जाया गया। वहां हरजीत सिंह रूपराह और आरव अग्रवाल ने उन्हें कर्ज की प्रक्रिया समझाई।

अलग-अलग शुल्क के नाम पर वसूली

14 और 15 अगस्त को 2 लाख रुपये प्रवेश शुल्क के नाम पर लिए गए। इसके बाद परियोजना रिपोर्ट और लेखाकार शुल्क के नाम पर 8 लाख 40 हजार रुपये लिए गए। आरोपियों ने कर्ज की राशि का पांच प्रतिशत कमीशन और उस पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर देने को कहा।

अलग-अलग लेनदेन में अशोक सिंघल के खाते में 67 लाख 80 हजार, हरजीत सिंह के खाते में 3 लाख रुपये, धर्मेंद्र झा को 40 हजार रुपये तथा अमृता देशमुख को 65 हजार 100 रुपये भेजे गए। इसके अलावा 38 लाख रुपये नकद दिए गए। अप्रैल 2026 में 10 लाख रुपये और लेने का आरोप है।

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प्रमाणपत्र और चेक भी लिए

आरोपियों ने आर्थिक क्षमता और चिकित्सकीय स्वास्थ्य प्रमाणपत्र मांगा। बाद में प्रमाणपत्र को फर्जी बताकर उसकी जांच कराने के नाम पर भी रकम ली। वहीं, हरजीतसिंह के कहने पर दिल्ली बुलाकर 84 पुनर्भुगतान चेक और दो हस्ताक्षर किए हुए चेक लिए गए।

13 नवंबर 2025 और 30 मार्च 2026 को दोबारा बुलाकर अंग्रेजी प्रपत्रों तथा कोरे कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए। इसके बावजूद कर्ज की रकम नहीं मिली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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