

Chhatrapati Sambhajinagar Cyber Fraud Prevention Police Advisory: 'मोबाइल पर कोई संदेश आए, अनजान फोन हो या ऑनलाइन लेनदेन का मामला, तुरंत प्रतिक्रिया न दें। पहले ठहरें, सोचें और जांचें।'
साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों से यह सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल अनजान लोगों के नाम से ही ठगी नहीं कर रहे, बल्कि परिचितों की तस्वीर, नाम और पहचान का भी दुरुपयोग कर रहे हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी, बैंक संबंधी जानकारी अद्यतन करने, फर्जी निवेश, शेयर कारोबार और नकली ग्राहक सेवा के नाम पर भी नागरिकों को जाल में फंसाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी संदेश, फोन, लिंक या आर्थिक लेनदेन पर भरोसा करने से पहले उसकी वास्तविकता की पुष्टि करना जरूरी है।
साइबर ठग परिचित व्यक्ति की तस्वीर लगाकर संदेश भेजते हैं और अचानक धन की जरूरत बताकर रकम भेजने के लिए कहते हैं। तस्वीर और नाम परिचित होने के कारण लोग बिना पुष्टि किए पैसे भेज देते हैं।
शहर में पिछले महीने ऐसे ही मामलों में परिचित व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल कर 50 लाख रुपये और एक अन्य मामले में संदेश सेवा की परिचय तस्वीर का दुरुपयोग कर 3.70 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई।
पुलिस आयुक्त ने नागरिकों से कहा है कि परिचित के नाम से धन की मांग वाला संदेश आने पर भी संबंधित व्यक्ति के वास्तविक मोबाइल नंबर पर फोन कर पुष्टि करें। किसी दूसरे विश्वसनीय माध्यम से जानकारी सुनिश्चित किए बिना पैसा न भेजें।
साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। किसी अपराध में नाम आने या जांच में फंसने का भय दिखाकर व्यक्ति को वीडियो बातचीत में जोड़ा जाता है।
इसके बाद बैंक खाते की जानकारी या धनराशि मांगी जाती है। ऐसे फोन या संदेश से घबराने के बजाय संबंधित विभाग से स्वतंत्र माध्यम से जानकारी की पुष्टि करने की सलाह पुलिस ने दी है।
फर्जी निवेश योजनाओं और शेयर कारोबार के माध्यम से भी नागरिकों को ठगा जा रहा है। शुरुआत में कम रकम निवेश करवाकर लाभ दिखाया जाता है। इसके बाद बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। रकम निकालने के समय कर, शुल्क या अन्य कारण बताकर अतिरिक्त पैसा मांगा जाता है।
बैंक खाते की जानकारी अद्यतन करने, ऑनलाइन भुगतान सुविधा जारी रखने या खाता बंद होने से बचाने के नाम पर भी ठग नागरिकों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद ओटीपी, पिन, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक या वित्तीय संस्था के नाम से आए किसी संदेश में दिए गए लिंक या फोन नंबर पर भरोसा न करें। संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से ही जानकारी की पुष्टि करें।
व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से भेजी गई अनजान एपीके फाइल डाउनलोड या स्थापित नहीं करें। अनजान लिंक, क्यूआर संकेत, फोन या संदेश पर तत्काल भरोसा करने से भी बचें। किसी फाइल या लिंक को खोलने से पहले उसके स्रोत की जांच करना जरूरी है।
साइबर अपराधी फर्जी ग्राहक सेवा केंद्र, ऑनलाइन ऋण आवेदन, नकली खरीदारी वेबसाइट और विवाह संबंधी वेबसाइटों के माध्यम से भी ठगी कर रहे हैं। पहले विश्वास हासिल किया जाता है और बाद में शुल्क, अग्रिम भुगतान या अन्य बहाने से रकम मांगी जाती है।
पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों से ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी परिचित की तस्वीर या नाम से संदेश आने पर भी पहले उसकी पुष्टि करें और दबाव में आकर तत्काल आर्थिक लेनदेन न करें।
यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर सहायता केंद्र पर संपर्क करें। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।