भीषण गर्मी का कहर: संभाजीनगर में जलसंकट गहराया, 123 टैंकरों पर निर्भर 4.84 लाख लोग

Sambhajinagar Water Crisis: भीषण गर्मी के बीच छत्रपति संभाजीनगर जिले के 82 गांव और 19 वाड़े जलसंकट से जूझ रहे हैं। 123 टैंकरों से साढ़े चार लाख से अधिक लोगों को पानी पहुंचाया जा रहा है।
The Scourge of Extreme Heat: Water Crisis Deepens in Sambhajinagar; 4.84 Lakh People Dependent on 123 Tankers
संभाजीनगर पानी समस्या, टैंकर जलापूर्ति,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar Tanker Water Supply: छत्रपति संभाजीनगर मई की भीषण गर्मी ने जिले के ग्रामीण इलाकों में जलसंकट को गंभीर बना दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। जिले में फिलहाल 123 टैंकरों के जरिए साढ़े चार लाख से अधिक नागरिकों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

कुएं सूख चुके हैं, बोरवेल जवाब दे चुके हैं और जलस्रोत खत्म होने से गांव-गांव में पानी के लिए संघर्ष तेज हो गया है। हालांकि प्रशासन स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिला प्रशासन की 6 मई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 82 गांव व 19 बाड़े जलसंकट से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों के करीब 4 लाख 84 हजार लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। सबसे गंभीर स्थिति छत्रपति संभाजीनगर व गंगापुर तहसील में बनी हुई है। छत्रपति संभाजीनगर तहसील के 15 गांव व 13 वाड़ों के लिए 39 टैंकर चलाए जा रहे हैं, जबकि गंगापुर तहसील के 22 गांवों में 36 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।

वैजापुर तहसील के 16 गांव व एक वाड़े के लिए 20 टैंकर लगाए गए हैं। कहीं सिल्लोड़ तहसील के 17 गांवों में 16 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। दूसरी और कन्नड़, खुलताबाद और सोयगांव तहसीलों में जल प्रबंधन कार्यों के चलते फिलहाल किसी टैंकर की जरूरत नहीं पड़ी है।

प्रशासन ने 86 कुएं नियंत्रण में लिए

जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने निजी कुओं का अधिग्रहण भी शुरू किया है। जिले में अब तक 86 कुओं को प्रशासन ने अपने नियंत्रण में लिया है। इनमें 34 कुएं टैंकरों के लिए तथा 52 अन्य उपयोग के लिए अधिग्रहीत किए गए हैं।

विशेष रूप से वैजापुर व गंगापुर तहसील में यह संख्या अधिक है। इसके बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। प्रशासन द्वारा स्वीकृत 266 टैंकर फेरों में से केवल 238 फेरे ही पूरे हो पा रहे हैं।

तकनीकी कारणों से 28 फेरे कम पड़ने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। यदि मानसून शुरू होने तक यही स्थिति बनी रही तो कई गांवों में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

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