महाराष्ट्र राजनीति में भूचाल: नामांकन वापस लेने पर कांग्रेस उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल पार्टी से निष्कासित

Shailesh Agarwal: चंद्रपुर-वर्धा-गडचिरोली विधान परिषद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल द्वारा ऐन वक्त पर नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी ने उन पर बड़ी कार्रवाई की है।
shailesh agarwal congress expelled chandrapur wardha mlc election
Shailesh Agarwal (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Chandrapur Congress Expulsion: चंद्रपुर-वर्धा-गड़चिरोली स्थानीय निकाय सीट के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शैलेश अग्रवाल के अचानक उम्मीदवारी वापस लेने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अग्रवाल की पार्टी सदस्यता रद्द कर दी है और उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी ने साफ किया है कि यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के आदेश पर की गई। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एड. गणेश पाटिल की तरफ से जारी एक पत्र में कहा गया है कि शैलेश अग्रवाल के कहने पर कांग्रेस ने उन्हें चंद्रपुर-वर्धा-गड़चिरोली विप सीट से अधिकृत उम्मीदवारी दी थी।

लेकिन, उन्होंने पार्टी नेतृत्व को बिना बताए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इस कार्रवाई से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं और पत्र में कहा गया है कि यह मामला बहुत गंभीर और गलत है।कांग्रेस ने विप चुनाव में महायुति के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए अग्रवाल पर भरोसा दिखाया था।

पार्टी को अंधेरे में रखकर नाम वापस लेने का आरोप

लेकिन, नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन उनके अचानक नामांकन वापस लेने से कांग्रेस की स्थानीय और राज्य नेतृत्व हैरान रह गए। खास बात यह है कि ऐसी चर्चा है कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेते समय पार्टी के कई स्थानीय नेताओं को भरोसे में नहीं लिया। अग्रवाल ने कहा था कि संख्याबल कम होने की वजह से उम्मीदवारी वापस लेने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाए कि कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा के साथ मिलकर मतदाताओं में पैसे बांट रहे हैं।

राजनीतिक हलचल बढ़ी

उनके आरोपों से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। इस बीच, कांग्रेस प्रत्याशी शैलेश अग्रवाल और निर्दलीय सुधीर कोठारी दोनों के नाम वापस लेने के बाद, महायुति प्रत्याशी अरुण लखानी बिना किसी विरोध के चुन लिए गए। अग्रवाल के निलंबन ने एक बार फिर कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को सामने ला दिया है। इस फैसले पर राज्य के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस चल रही है क्योंकि पार्टी ने जिस प्रत्याशी को नामित किया था, उसकी सदस्यता सीधे रद्द करने की कार्रवाई की गई है। आने वाले स्थानिय निकाय और दूसरे चुनावों की पृष्ठभूमिपर कांग्रेस के संगठनात्मक स्टेटस् पर भी सवाल उठ रहे हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com