नाफेड पोर्टल अचानक बंद होने से किसानों में हड़कंप; वरोरा मंडी में हंगामा, पोर्टल पुन: शुरू करने की उठी मांग

Chandrapur News: नाफेड का पोर्टल बंद होने से वरोरा मंडी में चने की खरीद रुक गई, जिससे किसानों ने हंगामा किया। राजेंद्र चिकटे ने पोर्टल तुरंत शुरू कर खरीद सीमा बढ़ाने की मांग सरकार से की है।
Nafed portal closure halted chana procurement at Warora Mandi, sparking farmer protests. Rajendra Chikte urged the government to reopen the portal and extend limits.
(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Farmer Issues News: सरकार द्वारा नाफेड के माध्यम से समर्थन मूल्य पर चना खरीदा जाता है, लेकिन यह खरीद पोर्टल शुक्रवार रात अचानक बंद हो जाने से किसानों में हड़कंप मच गया। इस बीच, वरोरा कृषि उपज मंडी समिति द्वारा शनिवार को चना लेकर बुलाए गए 50 किसानों की खरीद अटकने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार राज्य सरकार नाफेड के जरिए किसानों का चना समर्थन मूल्य पर खरीदती है।

इसके लिए किसानों को पहले पंजीकरण कराना होता है। इस वर्ष हजारों किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से बहुत कम किसानों का चना अब तक खरीदा गया है। पंजीकृत किसानों को चरणबद्ध तरीके से मंडी समिति द्वारा चना लेकर बुलाया जाता है। 25 अप्रैल  को 50 किसानों को चना लेकर बुलाया गया था, लेकिन 24 अप्रैल की रात को ही नाफेड का खरीद पोर्टल अचानक बंद हो गया। इसके चलते शनिवार को पहुंचे किसानों का चना मंडी समिति खरीद नहीं सकी, जिससे मार्केट यार्ड में काफी हंगामा हुआ।

जानकारी मिलते ही कृषि उपज मंडी समिति के पूर्व सभापति एवं वर्तमान संचालक राजेंद्र चिकटे मौके पर पहुंचे और किसानों तथा मंडी अधिकारियों के बीच चर्चा करवाई। चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि मार्केट यार्ड में आए किसानों के चने का तौल कर उसे गोदाम में रखा जाएगा और पोर्टल शुरू होने के बाद नाफेड द्वारा इसकी खरीद की जाएगी।

पोर्टल तुरंत शुरू करने की मांग

नाफेड द्वारा चना खरीद पर प्रति क्विंटल लगभग 5,800 रुपये तक का भाव दिया जाता है, जबकि निजी व्यापारी 5,100 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीद रहे हैं। ऐसे में निजी बाजार में चना बेचने वाले किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि राज्य की नाफेड खरीद सीमा पूरी होने के कारण पोर्टल बंद किया गया है। इससे पंजीकृत हजारों किसानों को नुकसान होने की आशंका है। इस नुकसान से बचाने के लिए खरीद अवधि बढ़ाकर पोर्टल तुरंत शुरू करने की मांग पूर्व सभापति एवं वर्तमान संचालक राजेंद्र चिकटे ने सरकार से की है।