

Arun Lakhani Mahayuti Unopposed Victory: चंद्रपुर-वर्धा-गड़चिरोली स्थानीय निकाय मतदाता संघ चुनाव में गुरुवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार शैलेश अग्रवाल ने अपना नामांकन ही वापस ले लिया। उसके बाद, निर्दलीय सुधीर कोठारी ने भी नाम वापस ले लिया, जिससे महायुति के प्रत्याशी अरुण लाखानी विधान परिषद निर्विरोध चुने गए। नामांकन वापसी के अंतिम दिन, अग्रवाल जिलाधिकारी कार्यालय गए और अपना नामांकन वापस ले लिया।
उसके बाद कोठारी भी पीछे हट गए, जिससे अरुण लाखानी चुनाव मैदान में अकेले प्रत्याशी बचे। जिलाधिकारी द्वारा चुनाव विभाग को दोनों प्रत्याशियों के नाम वापस लेने की जानकारी देने के बाद, लाखानी के निर्विरोध निर्वाचन की अधिकृत पुष्टि हुई। कांग्रेस द्वारा अपने प्रत्याशी घोषित करने के बाद, शैलेश अग्रवाल ने चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी, हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने यह महसूस करने के बाद नाम वापस लेने का फैसला किया कि चुनाव क्षेत्र की ताकत को देखते हुए जीत की संभावना कम है। खास बात यह है कि इस फैसले की जानकारी स्थानीय कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पहले से नहीं दी गई थी।
इससे कांग्रेस पार्टी में बेचैनी का माहौल बन गया है और कार्यकर्ताओं में नाराजगी जाहिर की जा रही है। इस बीच, निर्दलीय प्रत्याशी सुधीर कोठारी ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे अरुण लाखानी की जीत का रास्ता साफ हो गया। नतीजतन, विधान परिषद के लिए उनका बिना विरोध चुना जाना पक्का हो गया। कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव मैदान से हटने से पार्टी की संगठनात्मक ताकत पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी तरफ, इसे महायुति के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह स्थानीय निकाय में उनके असर का संकेत है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इन घटनाक्रमों से आने वाले दिनों में चंद्रपुर, वर्धा और गड़चिरोली के तीन जिलों में स्थानीय निकायों की राजनीति पर असर पड़ सकता है।
अपनी अर्जी वापस लेने के बाद मीडिया से बात करते हुए अग्रवाल ने साफ किया कि वह कम संख्या बल के कारण चुनाव से हट रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस फैसले के बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को बता दिया था।