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परशुरामजी जयंती: भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यास ने बताया शस्त्र-शास्त्र का महत्व, कहा- दुष्टों के संहार के लिए..

Parshuram Jayanti Chandrapur News: भगवान परशुरामजी जयंती पर मुरलीमनोहर व्यास ने दुष्टों के संहार के लिए क्रोध की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत किए।

  • Author By Manishkumar Mishra | published By रूपम सिंह |
Updated On: Apr 21, 2026 | 05:29 PM
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Chandrapur News: चंद्रपुर भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आध्यात्मिक चिंतक व भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यास ने कहा कि दुष्टों और अत्याचारियों के संहार के लिए क्रोध भी आवश्यक होता है। यह विचार उन्होंने श्री गोवर्धननाथजी हवेली, चंद्रपुर में रविवार को शयन दर्शन के दौरान व्यक्त किए।

उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने अन्यायी क्षत्रियों के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त करने के लिए क्रोधावतार धारण किया। राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर क्रोध भी धर्म का अंग बन जाता है।

व्यास ने कथा के माध्यम से सहस्त्रार्जुन का उल्लेख करते हुए बताया कि उसने कठोर तपस्या कर वरदान प्राप्त किया और अहंकार में आकर अत्याचार करने लगा। उसने जमदग्नि ऋषि और माता रेणुका का अपमान कर उनकी कामधेनु का हरण किया। इसके बाद भगवान परशुराम ने युद्ध में सहस्त्रार्जुन का वध किया तथा बाद में उसके पुत्रों द्वारा जमदग्नि ऋषि की हत्या का भी प्रतिशोध लिया।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि परशुरामजी ने सभी क्षत्रियों का नहीं, बल्कि केवल दुष्ट और अत्याचारी क्षत्रियों का संहार किया। इसका प्रमाण यह है कि उन्होंने अपना शिव धनुष राजा जनक के पास सुरक्षित रखा, जिससे सज्जन क्षत्रियों के प्रति उनके सम्मान का भाव स्पष्ट होता है।

व्यास ने कहा कि परशुरामजी के क्रोध के पीछे भी धर्म की स्थापना का उद्देश्य था, जबकि भगवान श्रीकृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्ग में श्रीकृष्ण के प्रेम स्वरूप की उपासना की जाती है, लेकिन परशुरामजी के क्रोधावतार को भी श्रद्धा और सम्मान के साथ वंदन किया जाता है। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगवान परशुराम जयंती का भक्तिभाव से उत्सव मनाया।

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Published On: Apr 21, 2026 | 02:06 PM

Topics:  

  • Chandrapur News
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