चंद्रपुर में 13 करोड़ का व्यापारी संकुल बेकार, डिपॉजिट 70 हजार करने के बाद भी बेरोजगार युवाओं ने मोड़ा मुंह

Mul Municipal Council: चंद्रपुर के मूल में 13.72 करोड़ रुपए की लागत से बना छत्रपति शिवाजी महाराज व्यापारी संकुल दो बार निविदा निकालने के बावजूद वीरान पड़ा है।
chandrapur mul municipal council commercial complex unoccupied stores
मूल नगर परिषद(सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Chandrapur Commercial Complex: शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार और स्वरोजगार का अवसर देने के उद्देश्य से नगर परिषद, मूल ने 13 करोड़ 72 लाख 23 हजार 610 रुपए खर्च कर छत्रपति शिवाजी महाराज व्यापारी संकुल बनाया। उद्घाटन के बाद नामकरण भी हुआ, लेकिन करोड़ों की लागत से तैयार यह संकुल आज भी व्यापारियों का इंतजार कर रहा है। दो बार निविदा निकालने के बावजूद स्थानीय कारोबारियों और बेरोजगार युवाओं ने दुकानों में रुचि नहीं दिखाई।

शुरुआत में दुकानों की अनामत राशि करीब साढ़े तीन लाख रुपए रखी गई थी। बाद में इसे घटाकर 70 हजार रुपए किया गया और मासिक किराया 5,500 रुपए निर्धारित किया गया। इसके बावजूद व्यापारी इसे पूरी तरह किफायती नहीं मान रहे हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि किराया और अन्य शर्तें वास्तविक बाजार क्षमता के अनुरूप रखी जातीं, तो कई युवा अपना व्यवसाय शुरू कर सकते थे और नगर परिषद को भी नियमित आय मिलती।

chandrapur mul municipal council commercial complex unoccupied stores
नासिक मनपा महासभा: हादसों के मुद्दे पर हंगामे के आसार, 4 मुख्य प्रस्तावों पर होगी चर्चा

खाली इमारत बनी असामाजिक तत्वों का निशाना

दुकानें खाली रहने के दौरान संकुल की देखरेख के अभाव में अज्ञात समाजकंटकों ने इमारत में तोड़फोड़ कर दी। महंगे विद्युत वायरिंग, लाइट और अन्य सामग्री चोरी होने से संकुल को बड़ा नुकसान पहुंचा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी इमारत की सुरक्षा और उपयोगिता सुनिश्चित क्यों नहीं की जा सकी? बेरोजगार युवाओं और नागरिकों की मांग है कि केवल कागजों पर किराया-डिपॉजिट कम करने के बजाय इमारत की तत्काल मरम्मत कर जरूरतमंद युवाओं को गाले आवंटित किए जाएं। तभी जिस उद्देश्य से यह संकुल बनाया गया था, वह पूरा हो सकेगा।

बेरोजगारों की उम्मीद पर फिरा पानी

नगर परिषद ने रोजगार का सपना दिखाकर करोड़ों रुपए खर्च किए, लेकिन ऊंची अनामत राशि और किराए के कारण स्थानीय युवाओं ने शुरुआत में दूरी बनाए रखी। लगातार मांग के बाद दरों में कमी की गई, फिर भी व्यावसायिकों का कहना है कि वर्तमान किराया भी उनकी क्षमता के अनुरूप नहीं है। नगराध्यक्ष एकता समर्थ के अनुसार, बेरोजगार युवाओं को किफायती दरों पर दुकानें उपलब्ध कराने के लिए अनामत राशि घटाकर 70 हजार रुपए और मासिक किराया 5,500 रुपए किया गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से जल्द ही इमारत की मामूली मरम्मत कर जरूरतमंद युवाओं को दुकानें आवंटित की जाएंगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com