

Chandrapur Elephants Damage Crops: गड़चिरोली जिले से नदी पार कर शुक्रवार रात दो टस्कर हाथियों ने चंद्रपुर जिले में प्रवेश किया। सामदा बुज के दागोबा देवस्थान, वाघोली बुट्टी और व्याहाड बुज क्षेत्र से होते हुए जंगल की ओर बढ़े हाथियों ने रास्ते में आने वाली धान की फसल को बुरी तरह रौंद दिया। कई खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर गई।
मेहनत से तैयार फसल को आंखों के सामने बर्बाद होते देख किसानों में रोष और चिंता है। हाथियों के जिले में प्रवेश की सूचना मिलते ही वनविभाग सक्रिय हो गया। शुक्रवार रात से ही वनकर्मियों ने हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। संभावित मार्ग चिह्नित कर आसपास के ग्रामीणों और किसानों को सतर्क किया गया। दागोबा देवस्थान से आगे बढ़ते हुए दोनों हाथी वाघोली बुट्टी और व्याहाड बुज क्षेत्र से होते हुए जंगल में पहुंच गए।
क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई का मौसम चल रहा है। किसानों ने खेतों में धान की रोपाई कर रखी है। ऐसे में हाथियों के गुजरने से कई खेतों की फसल रौंद दी गई। कुछ स्थानों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है। सामदा, वाघोली और व्याहाड क्षेत्र के कई किसान इससे प्रभावित हुए हैं। किसानों ने नुकसानग्रस्त खेतों का तत्काल निरीक्षण कर पंचनामा कराने और शासन के नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।
फिलहाल हाथियों का चंद्रपुर जिले के डेरा साखरी सिर्सी जंगल क्षेत्र में है। उनके भ्रमण मार्ग में जिन खेतों को नुकसान पहुंचा है, उनका पंचनामा करने के लिए टीम गठित की गई है। रास्ते में आने वाले सभी प्रभावित किसानों के खेतों का पंचनामा किया जाएगा। यदि कोई किसान छूट जाता है तो वह वनविभाग को लिखित आवेदन कर सकता है।
किसानों के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले भी हाथियों ने क्षेत्र में पहुंचकर बड़े पैमाने पर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया था। अब दोबारा हाथियों के लौटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने हाथियों के उपद्रव को रोकने के लिए स्थायी उपाय करने और वास्तविक नुकसान के अनुपात में मुआवजा देने की मांग की है।
हाथियों की निगरानी के लिए रात में 20 वनकर्मियों और दिन में 10 वनविभाग की टीम तैनात की गई है। ड्रोन के जरिए भी लगातार नजर रखी जा रही है। नागरिकों से सतर्क रहने और वनविभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।