

Chandrapur Tiger Attack: चंद्रपुर जंगल का राजा कहे जाने वाले धारीदार बाघ को पकड़ना आसान नहीं है। लेकिन जब शांत कही जानेवाली भैसों के झुंड के किसी सदस्य की जान का सवाल आता है, तो यह भैंसें भी बाघ को पानी पिला देती हैं। बुधवार दोपहर को सिंदेवाही तालुका के नवरगांव इलाके में यह नजारा देखने को मिला। अंतरगांव के एक किसान शंकर मेश्राम हमेशा की तरह अपने मवेशियों को चराने ले गए थे।
यह झड़प दोपहर 230 बजे हुई। नाचनभट्टी बीट के मिनघरी मामा तालाब इलाके में एक बाघ ने गाय पर हमला कर दिया। लेकिन भैंसों ने लामबंद होकर जैसे ही रुद्र अवतार धारन किया वैसे बाघ को दुम दबाकर जंगल में भागना पड़ा। बहादुरी से जान बचाने वाली भैंसों और गायों की एकता को लेकर इलाके के लोगों में दिलचस्प चर्चा चल रही है। झाड़ियों में छिपे एक बाघ ने झुंड की एक जर्सी गाय पर भयानक रूप दिखाया और शंकर मेश्राम तथा अन्य मवेशियों पर हमला कर दिया।
जैसे ही बाघ गाय का शिकार करनेवाला था, झुंड में मौजूद भैंसों ने समूह बना कर रुद्र अवतार ले लिया। मौत के मुंह में जाने के बाद भी, सभी भैंसों ने बिना सोचेसमझे अपने सींगों से बाघ पर हमला कर दिया। कई भैंसों को अपनी ओर आते देख बाघ भी असमंजस में पड गया। आखिर में, भैंसों का तीखा रोष देखकर बाघ वहां से जंगल में भाग गया। इस हमले में गाय गंभीर रूप से घायल हो गई। जानकारी मिलते ही वनविभाग ने मौके पर पहुंच कर पंचनामा किया है।
फिलहाल, बहादुर भैंसों की एकता और गाय की जान को लेकर इस इलाके के लोगों में दिलचस्प चर्चा हो रही है। पशुपालक मेश्राम ने वनविभाग से मुआवजे की मांग की है।
मिनघरी, अंतरगांव और नवरगांव के बीच पहाडीनुमा जंगल है। यहां एक सिचाई प्रकल्प बननेवाला था जो नहीं बन पाया। यहां से नहर का रास्ता है। साथ ही एक मामा तालाब भी है। ग्रीष्मकाल में अक्सर यहां बाघ, तेंदुआ व दूसरे वन्यजीव आते हैं। गांवों के मवेशियों को भी यहां पानी पिलाने ले जाया जाता है। ऐसे में यह घटना हुई है। बीते दिनों भी यहां विविध वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी है। इस घटना के बाद गांव के पशुपालकों में दहशत फैल गयी है। ।