मनपा में काबिल IAS की जरूरत, गोंडवाना विदर्भ मुक्ति संगठन की CM से गुहार, दम तोड़ रही योजनाएं

Gondwana Vidarbha Mukti Sangthan: चंद्रपुर शहर में गोंडवाना विदर्भ मुक्ति संगठन ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जिले को सक्षम आईएएस की जरूरत है।
Gondwana Vidarbha Mukti Sangthan: चंद्रपुर शहर में गोंडवाना विदर्भ मुक्ति संगठन ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि जिले को सक्षम आईएएस की जरूरत है।
देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-एक्स)
Updated on

Municipal Corporation: चंद्रपुर में सड़कों की बदहाली, पेयजल आपूर्ति योजना का बंटाधार, भूमिगत गटर योजना की विफलता, तमाम कोशिशों के बावजूद शहर में निर्माण हुए बाढ़ के संकट तथा शहर की अन्य प्रलंबित योजनाओं तथा समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय शहर महानगर पालिका में किसी सक्षम आईएएस अधिकारी की जरूरत होने की बात गोंडवाना विदर्भ मुक्ति संगठन ने कही है।

इस संदर्भ में संगठन के संयोजक योगेश समरित ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर स्थानीय मनपा में सक्षम आईएएस अधिकारी नियुक्त करने की गुहार लगाई है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में समरित ने कहा है कि, पिछले कुछ दिनों से चंद्रपुर शहर विभिन्न समस्याओं से ग्रसित है। नालों की अपर्याप्त सफाई के अभाव में जरा सी बारिश में शहर की बस्तियां जलमग्न हो रही है। जिसका खामियाजा शहर के नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।

अतिक्रमण की रोकथाम में मनपा फेल

जिला तथा मनपा प्रशासन की ओर से इसी वर्ष करोड़ों का खर्च करते हुए इराई नदी का गहरीकरण किया गया, बावजूद इसके इस बार पिछले सप्ताह में नदी किनारे बसी बस्तियों को बाढ़ के पानी की समस्या झेलनी ही पड़ी। शहर में तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण की रोकथाम करने में भी मनपा विफल साबित हो रही है। यही वजह है कि, थोड़ी सी बारिश में भी नालियों से पानी की निकासी बाधित होने से शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति निर्माण होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि, नालियों की सफाई के नाम पर मनपा में सिर्फ ठेकेदारों का लाभ देखा जा रहा है।

दम तोड़ रही भूमिगत गटर योजना

उन्होंने कहा कि, शहर के लिए सरकार ने 500 करोड़ की भूमिगत गटर योजना कार्यान्वित की लेकिन यह योजना अपने प्राथमिक चरण में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना के तहत जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किये गए है, उनका निर्माण नदी में किया गया है। बरसात के दिनों में यह नदी लबालब होती है जिससे यह ट्रीटमेंट प्लांट पानी मे डूब जाते है और इससे भूमिगत गटर योजना प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि, इराई नदी से शहर को प्रतिवर्ष बाढ़ की आपदा झेलनी पड़ती है। इस त्रासदी को कम करने के लिए माना खदान परिसर में एक बैरेज बनाया जा सकता है, ताकि बाढ़ की स्थिति में नदी का बैकवाटर इस बैरेज में जमा हो पायेगा और इस जलसंग्रहण का शहर में जलापूर्ति के लिए उपयोग किया जा सकता है।

Navbharat Live
navbharatlive.com