

Chandrapur Farmer Financial Crisis: जब खेत में दिन-रात मेहनत कर फसल उगाने वाले किसान को उसे बेचने के लिए घर-घर और गांव-गांव घूमना पड़े और मेहनत की कमाई से पेट्रोल का खर्च भी न निकले, तो यह कृषि व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने लाता है। बल्लारपुर के किसान पंकज करमरकर फिलहाल इसी स्थिति से जूझ रहे हैं। उन्होंने चार एकड़ में धनिया की खेती पर लाखों रुपए खर्च किए, लेकिन बाजार में भाव गिरने के कारण अब फसल बेचने के लिए होने वाला पेट्रोल खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है।
करमरकर के अनुसार, उन्होंने करीब चार एकड़ जमीन में धनिया की फसल लगाई थी। इसके लिए बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी, सिंचाई और अन्य खर्चों पर बड़ी राशि खर्च की। उन्हें उम्मीद थी कि बाजार में अच्छे भाव मिलेंगे और खेती का खर्च निकलने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतें भी पूरी होंगी। लेकिन फसल तैयार होते ही धनिया के भाव अचानक गिर गए।
स्थिति यह है कि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए गांव-गांव घूमना पड़ रहा है। धनिया की एक जुड़ी महज 10 रुपए में बेचनी पड़ रही है। इतनी कम कीमत में बिक्री होने से पेट्रोल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। उत्पादन के बाद फसल को बाजार तक पहुंचाने, परिवहन और दिनभर खड़े होकर बिक्री करने का अतिरिक्त खर्च भी किसान को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में लागत वसूल करना ही चुनौती बन गया है।
किसान का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। उचित बाजार भाव नहीं मिलने पर किसानों के सामने कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। पंकज करमरकर ने सरकार से किसानों की स्थिति पर तत्काल ध्यान देने और कृषि उपज को उचित भाव दिलाने के साथ बाजार व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों का आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
बल्लारपुर के धनिया उत्पादक किसान पंकज करमरकर ने कहा कि चार एकड़ जमीन में धनिया लगाने के लिए काफी मेहनत और पैसा खर्च किया। फसल तैयार होने पर बाजार में अपेक्षित भाव नहीं मिला। उचित कीमत नहीं मिलने के कारण अब खेत की धनिया सड़क किनारे खड़े होकर बेचनी पड़ रही है।