हाईवे पर दिखेगी हरियाली की नई चादर, कारधा से मुजबी तक बिछेगा प्रकृति का कवच

एनएचएआई ने कारधा से मुजबी तक हरियाली बढ़ाने की योजना बनाई है, जिससे पर्यावरण और सड़क सुरक्षा में संतुलन बनेगा।
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Bhandara Road: पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के बीच एक आदर्श संतुलन बनाने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचएआई, नागपुर ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. इसके तहत कारधा से मुजबी तक के लगभग 9 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सैकड़ों नए पेड़ लगाए जाएंगे. कुछ समय बाद ही यह पौधारोपण शुरू होने जा रहा है.

यह परियोजना न केवल हाईवे के विस्तार के दौरान काटे गए प्राचीन वृक्षों की भरपाई करेगी, बल्कि हाइवे से गुजरने वाले यात्रियों को एक सुखद और सुरक्षित सफर का अहसास भी कराएगी. एनएचएआई ने इस पौधारोपण अभियान को दो रणनीतिक चरणों में विभाजित किया है. सुरक्षा और सौंदर्य के लिए तैयार मास्टर प्लानपहले चरण में मुजबी से भंडारा तक का हिस्सा कवर किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में भंडारा से कारधा तक हरियाली बिखेरी जाएगी.

विशेष बात यह है कि यह पूरी कवायद मधुमक्खी गलियारा परियोजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. इस पहल के जरिए नीम, करंज, पलाश, महुआ और जामुन जैसी देशी प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो परागण करने वाले जीवों को नया जीवन देने और कार्बन उत्सर्जन को सोखने में सहायक हो सकते है.

हरियाली के साथ सावधानी भी राजमार्ग पर लगे पेड़ केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये एक सुरक्षा कवच का कार्य भी करते हैं. डिवाइडर के बीच लगी झाड़ियां रात के समय सामने से आने वाले वाहनों की हेडलाइट ग्लेयर चकाचौंध को रोकती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम हो जाती है. हालांकि, विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि अनियोजित पौधारोपण जोखिम भी पैदा कर सकता है.

मोड़ पर घनी झाड़ियां विजिबिलिटी कम कर देती हैं, वहीं सड़क के अत्यंत समीप मजबूत तने वाले पेड़ अनियंत्रित वाहनों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर भविष्य के खतरों को देखते हुए एनएचएआई अब पतले तने वाले और लंबवत बढ़ने वाले पेड़ों के रोपण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इसके साथ ही सूखे पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाने और बिजली की लाइनों में फंसने वाली टहनियों की नियमित छंटाई प्रूनिंग का रोडमैप तैयार किया गया है. विभाग के सूत्रों के अनुसार, राजमार्ग विस्तारीकरण के साथसाथ पहले से दोगुनी संख्या में पौधे लगाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि विकास और प्रकृति साथसाथ चल सकें.

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