भंडारा: पवनी में कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, खाद और बीजों की कालाबाजारी के खिलाफ छापामार कार्रवाई से हड़कंप

Bhandara Fake Seeds: पवनी तहसील में खाद और बीजों की मनमानी कीमत वसूलने और नकली कृषि सामग्री बेचने की शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने छापेमारी तेज कर दी है। दोषी दुकानों के लाइसेंस रद्द होंगे।
Bhandara Fertilizer Black Marketing Investigation
कृषि विभाग छापामार प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- AI)
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Bhandara Fertilizer Black Marketing Investigation: खरीफ सीजन के दौरान भंडारा के पवनी तहसील में खाद, बीज और कीटनाशकों की बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि कई कृषि सेवा केंद्र संचालक निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर खाद, बीज और कीटनाशकों की बिक्री कर किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। बुआई का समय होने के कारण किसान मजबूरी में मनमानी कीमत चुकाकर कृषि सामग्री खरीदने को विवश हैं।

तहसील में 412 उर्वरक लाइसेंसी, 2 बीज उत्पादक

आंकड़ों के अनुसार, पवनी तहसील में कुल 412 लाइसेंसधारी कृषि सेवा केंद्र संचालित हैं। इनमें 143 कीटनाशक विक्रेता, 141 उर्वरक विक्रेता और 128 बीज विक्रेता शामिल हैं। इसके अलावा, केदार सीड्स, पवनी तथा चौरस फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी, असगांव (चौरस) नामक दो बीज उत्पादन इकाइयां भी कार्यरत हैं। किसानों ने मांग की है कि सभी लाइसेंसों का सत्यापन किया जाए, नवीनीकरण की जांच हो तथा बिना वैध अनुमति या नियमों के उल्लंघन के साथ व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

शिकायत करें, होगी कार्रवाई : नखाते

कृषि अधिकारी (गुण नियंत्रण) के. एन. नखाते ने किसानों से अपील की है कि यदि किसी दुकान पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जाती है, बिना बिल के सामग्री बेची जाती है अथवा किसी प्रकार की अनियमितता की जाती है, तो इसकी लिखित शिकायत तत्काल संबंधित तहसील कृषि कार्यालय में दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित कृषि सेवा केंद्र संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों ने की शिकायत

हाल ही में मांगली (चौ.) और पौनाखुर्द क्षेत्र में कृषि विभाग द्वारा नकली बीजों के खिलाफ छापामार कार्रवाई किए जाने के बाद किसानों की शिकायतों को और बल मिला है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह की अनियमितताएं लगातार बढ़ती रहेंगी। किसानों का कहना है कि बाजार में जानबूझकर खाद की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है।

आवश्यक उर्वरकों के साथ गैर-जरूरी अथवा निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदने के लिए भी किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। कई स्थानों पर बिना पक्के बिल के ही कृषि सामग्री बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे किसानों को भविष्य में शिकायत या मुआवजा लेने में भी कठिनाई हो सकती है।

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