प्याज की कीमतों में उछाल, भंडारा में रसोई का बजट बिगड़ा, उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

Onion Price Hike: भंडारा जिले में प्याज की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं और गृहिणियों की चिंता बढ़ा दी है। मई में सस्ते दामों पर मिलने वाला प्याज जून के पहले सप्ताह में काफी महंगा हो गया।
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Onion Price (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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Bhandara Farmers: भारतीय रसोई का अनिवार्य हिस्सा माना जाने वाला प्याज अब आम उपभोक्ताओं की आंखों में आंसू ला रहा है। आमतौर पर गर्मियों के मौसम में नई फसल की आवक होने से प्याज के दाम नियंत्रण में रहते हैं, लेकिन इस बार जून के पहले हफ्ते में ही कीमतों में भारी उछाल आ गया है। मई के महीने में जो प्याज बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध था, वह अब आम जनता के बजट से बाहर होता जा रहा है। संकट यह है कि बाजार में ऊंचे दाम चुकाने के बावजूद उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता का प्याज नहीं मिल पा रहा है, बल्कि जो माल उपलब्ध है वह भी कुछ गीला है। मई और जून का महीना मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सालभर का प्याज खरीदकर घर में स्टोर करने का समय होता है।

लोग पूरे साल की जरूरत के मुताबिक थोक बाजार से प्याज की बोरियां खरीदकर रख लेते हैं, लेकिन इस बार इस सालाना प्रक्रिया पर भी महंगाई की मार पड़ी है। मई महीने में सफेद प्याज की 40 किलो की बोरी करीब 700 रुपये में मिल रही थी, यानी उपभोक्ताओं को यह प्याज 16 से 17 रुपये प्रति किलो पड़ रहा था। जून के पहले हफ्ते में ही इसकी कीमत बढ़कर सीधे 900 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है।

खुदरा बाजार में 40 रुपये किलो तक पहुंची कीमत

यही हाल लाल प्याज का भी है। मई में जो लाल प्याज की 30 किलो की बोरी 250 रुपये में मिल रही थी, उसके दाम भी अब काफी बढ़ गए हैं। थोक बाजार में आई इस तेजी के कारण अब खुदरा बाजार में प्याज 30 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जा रहा है। प्याज के दामों में आई इस अचानक तेजी के पीछे डीजल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले महीनों में डीजल के दामों में चार बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

खेतों से प्याज को मुख्य बाजार तक लाने के लिए ट्रकों और टेम्पो जैसे मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने के कारण ट्रांसपोर्टरों ने मालभाड़ा बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर प्याज की मूल कीमत पर पड़ रहा है। प्रति किलो मालभाड़ा बढ़ जाने की वजह से अब ग्राहकों को अपनी जेब से ज्यादा पैसे ढीले करने पड़ रहे हैं।

किसानों को फायदा नहीं

बारिश शुरू होने से पहले गृहिणियां प्याज खरीदकर सुरक्षित रख लेना चाहती हैं, क्योंकि बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ने के कारण प्याज जल्दी सड़ने लगता है। इस वजह से बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की मांग अचानक बढ़ गई है, लेकिन उस अनुपात में आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

इसके अलावा, आने वाले दिनों में दाम और बढ़ने की उम्मीद में कई बड़े व्यापारियों ने प्याज का स्टॉक जमा कर लिया है, जिससे बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा हो गई है। हैरानी की बात यह है कि प्याज महंगा होने के बावजूद इसका सीधा फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। किसान अपनी फसल व्यापारियों को पहले ही कम दामों में बेच चुके हैं और अब गोदामों से माल महंगे दामों पर निकाला जा रहा है।

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