भंडारा में मनपा की ५ दुकाने सील, व्यापारियों ने केबिन के सामने सब्जिया फेंक कर किया आंदोलन

Bhandara Municipal: भंडारा नगर परिषद द्वारा 5 सब्जी व्यापारियों की दुकानें सील किए जाने पर हंगामा हो गया है। व्यापारियों और किसानों ने मुख्याधिकारी के केबिन के सामने सब्जियां फेंककर प्रदर्शन किया।
Bhandara Municipal Council Vegetable Market Protest
व्यापारी भंडारा नगर परीक्षा क आगे प्रदर्शन करते हुए (सौर्स- फोटो नवभारत)
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Bhandara Municipal Vegetable Market Protest: भंडारा शहर में महात्मा फुले सब्जी मंडी में पांच व्यापारियों की दुकानों को नगर परिषद द्वारा सील किए जाने के विरोध में बुधवार को किसानों और व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने भंडारा नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर मुख्याधिकारी के कक्ष के सामने बैंगन सहित बड़ी मात्रा में सब्जियां फेंककर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि बाजार शुल्क वसूली के नाम पर की गई इस कार्रवाई से पिछले दो दिनों से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी उपज खरीदने वाले प्रमुख व्यापारी कारोबार नहीं कर पा रहे हैं।

बकाया था शुल्क

भंडारा नगर परिषद ने 'महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत एवं औद्योगिक नगर अधिनियम, 1965' की धारा 272 के तहत बाजार शुल्क बकाया होने का हवाला देते हुए पांच व्यापारियों की दुकानों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई की जद में आए व्यापारियों में बंडू बारापात्रे, अतुल मानकर, मंगेश राउत, किरण भेदे और दीपक पराते शामिल हैं।

किसानों को भी हो रहा नुकसान

प्रतिदिन हजारों बोरी सब्जियों की खरीद-बिक्री होने वाली इस मंडी में कार्रवाई के बाद व्यापारियों और किसानों, दोनों का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किसानों का कहना है कि प्रमुख व्यापारियों का कारोबार बंद होने से उनकी उपज की बिक्री नहीं हो पा रही है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

प्रशासन के सामने रखी मांग

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि या तो सील की गई दुकानों को तत्काल खोला जाए अथवा प्रशासन स्वयं किसानों की उपज खरीदकर उसका उचित भुगतान करे। उनका कहना है कि जब तक इन दुकानों को नहीं खोला जाएगा, तब तक किसानों की उपज की बिक्री प्रभावित होती रहेगी।

आंदोलन पर कई सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। भंडारा शहर में चर्चा है कि लाखों-करोड़ों रुपये का बाजार शुल्क बकाया होने के कारण जिन पांच व्यापारियों पर कार्रवाई हुई है, उनके समर्थन में किसानों को आगे कर यह आंदोलन कराया गया। मंडी में अन्य बड़े व्यापारी भी सक्रिय हैं और किसानों के पास अपनी उपज बेचने के वैकल्पिक साधन भी मौजूद हैं, फिर भी केवल इन पांच दुकानों को लेकर इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन क्यों हुआ, इसे लेकर तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।

व्यापारियों ने लगाए गंभीर आरोप

संबंधित व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकानों के आसपास खुदाई कर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे बाजार में प्रवेश करना भी असंभव हो गया है। उनका दावा है कि नियमानुसार प्रति दुकान 100 रुपये किराया लिया जाना चाहिए, जबकि इसकी जगह प्रति बोरी पांच रुपये बाजार शुल्क वसूला जा रहा है। इस शुल्क को लेकर मामला फिलहाल न्यायालय (कोर्ट) में विचाराधीन है, इसके बावजूद प्रशासन ने कथित रूप से प्रतिशोध की भावना से यह कार्रवाई की है।

नपा की नई निविदा प्रक्रिया पर नजर

दूसरी ओर, नगर परिषद वर्ष 2026-27 के लिए बाजार शुल्क वसूली की नई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इस संबंध में 3 जुलाई को एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें 10 प्रतिशत बढ़ी हुई दरों के साथ नया ठेका दिए जाने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के राजस्व हित और किसानों-व्यापारियों के नुकसान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

प्रदर्शन से बनी तनावपूर्ण स्थिति

विरोध प्रदर्शन के दौरान जब किसान और व्यापारी नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और सब्जियां फेंककर अपना आक्रोश जताया, तो नगर परिषद कार्यालय और गांधी चौक क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। सूचना मिलते ही शहर थाना प्रभारी उल्लास भुसारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।

आधिकारिक पुष्टि नहीं

शहर के कुछ हलकों में यह भी माना जा रहा है कि बाजार शुल्क वसूली से बचने और प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से ही किसानों को इस आंदोलन का चेहरा बनाया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि चल रही कानूनी कार्रवाई का प्रभाव कम करने और प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिए इस आंदोलन की रणनीति तैयार की गई थी। हालांकि, इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने बाजार शुल्क वसूली, प्रशासनिक कार्रवाई और किसानों के वास्तविक हितों को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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