एनएसएफडीसी से फंड नहीं, भंडारा में चर्मकार समाज की कर्ज योजनाएं ठप

Maharashtra News: चर्मकार समाज के लिए केंद्र सरकार की ऋण योजनाएं अटकी हुई हैं। पुराने कर्ज की वसूली न होने से नई धनराशि जारी नहीं की जा रही है।
एनएसएफडीसी से फंड नहीं, भंडारा में चर्मकार समाज की कर्ज योजनाएं ठप
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Bhandara News: चर्मकार समाज के आर्थिक उत्थान के लिए केंद्र सरकार की ओर से संचालित ऋण योजनाएं इन दिनों अधर में लटक गई हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त व विकास निगम (एनएसएफडीसी), नई दिल्ली की ओर से नई धनराशि उपलब्ध न कराए जाने के कारण जिले के दर्जनों लाभार्थियों को मंजूर कर्ज का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूर्व में वितरित कर्ज की वसूली नहीं होती, तब तक नई राशि जारी नहीं की जाएगी। इस कड़े रुख के कारण चर्मकार समाज के युवाओं और छोटे उद्यमियों में निराशा का माहौल है।

बताया जाता है कि निगम की ओर से पहले लाभार्थियों के लिए 50 करोड़ रुपये की गारंटी उपलब्ध कराई गई थी, जिसकी वित्तीय समय सीमा दिसंबर 2024 में समाप्त हो चुकी है। इसके बाद अब तक नई धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई है।

जिला स्तर से निगम को 14 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग भेजी गई है, ताकि लंबित प्रकरणों का निपटारा किया जा सके, लेकिन दिल्ली स्थित मुख्यालय से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। फंड की कमी का सीधा असर उन फाइलों पर पड़ा है जिन्हें मंजूरी मिल चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार एनएसएफडीसी की विभिन्न योजनाओं के तहत कर्ज प्राप्ति के लिए 56 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 38 प्रकरण मंजूरी के लिए भेजे गए। जांच के बाद 29 प्रकरणों को स्वीकृति मिली, जबकि 9 मामले अब भी लंबित हैं।

स्वीकृत 29 मामलों में से केवल 14 लाभार्थियों को ही धनराशि वितरित की जा सकी है। शेष 15 मामले बजट के अभाव में लंबित पड़े हैं और कार्यालयों में फाइलें धूल फांक रही हैं। इसके अलावा 18 अन्य प्रकरण जिला कार्यालय स्तर पर जांच की प्रक्रिया में अटके हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत चर्मकार समाज के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 1 लाख से लेकर 2.50 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य समाज के लोगों को छोटे उद्योगों से जोड़ना और उनका जीवन स्तर सुधारना है।

अनुदान योजना में भी सुस्ती

राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से संचालित 50 प्रतिशत अनुदान आधारित योजना की स्थिति भी सुस्त बनी हुई है, जिससे समाज के कई इच्छुक लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।