Bhandara News: करडी गांव में पेयजल संकट पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, जल प्रबंधन सुधारने की मांग

Jal Jeevan Mission: मोहाडी तहसील के करडी गांव में पिछले छह दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। सूखे जलस्रोत, जल जीवन मिशन की पाइपलाइन की खामियां और गोसीखुर्द बांध के जल प्रबंधन पर सवाल उठाए है।
karadi village mohadi drinking water crisis jal jeevan mission
करडी गांव जल संकट- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Updated on

Karadi Village Water Crisis: मोहाडी तहसील के करडी गांव में भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। सरकारी स्तर पर जल प्रबंधन की खामियों और प्रकृति की मार के कारण गांव में पिछले छह दिनों से नलों में पानी नहीं आ रहा है। गांव को पानी उपलब्ध कराने वाला मुख्य जलस्रोत सूख जाने से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। करडी गांव में पानी की समस्या वर्षों से बनी हुई है।

वर्षभर किसी न किसी कारण से जलापूर्ति प्रभावित होती रहती है। गांव के अधिकांश कुओं का पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है, इसलिए ग्रामीणों को खेतों और अन्य स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार स्वर्गीय शालिक राऊत (मुंढरी खुर्द) ने गांव के लिए पेयजल व्यवस्था हेतु अपने खेत की जमीन दान में दी थी, जहां बनी कुएं से गांव में पानी की आपूर्ति की जाती थी।

करडी गांव में पेयजल संकट पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

लेकिन गर्मी के दिनों में इस कुएं का जलस्तर काफी कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में राजेश राऊत के खेत स्थित कुएं से टैंकर के माध्यम से ग्राम पंचायत के कुएं में पानी डाला जाता था। इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं होने और धान की रोपाई शुरू होने से राजेश राऊत ने पिछले छह-सात दिनों से सिंचाई के लिए पानी रोक दिया, जिससे ग्राम पंचायत के कुएं में भी पानी समाप्त हो गया और गांव की जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

गोसीखुर्द बांध संचालन पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने गोसीखुर्द बांध के संचालन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बारिश के दौरान वैनगंगा नदी में पानी आने के बावजूद बांध के कई गेट खोलकर पानी तेजी से छोड़ दिया जाता है। इससे नदी में जलस्तर लंबे समय तक नहीं टिक पाता और भूजल का पुनर्भरण नहीं हो पाता।

परिणामस्वरूप नदी किनारे स्थित अनेक कुएं भी सूख गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि बारिश के दौरान आने वाले पानी को एक साथ छोड़ने के बजाय चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाए, ताकि नदी का जलस्तर बना रहे, भूजल रिचार्ज हो और आसपास के कुओं में पानी की उपलब्धता बनी रहे।

जल जीवन मिशन की पाइपलाइन पर भी सवाल

करोड़ों रुपये की लागत से जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई नई पाइपलाइन पर भी गंभीर सवाल उठाए है। नई पाइपलाइन पुरानी व्यवस्था से भी बदतर साबित हुई है। पाइपलाइन का नेटवर्क सही तरीके से तैयार नहीं किया गया, जिससे कई गलियों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग के अभियंताओं और ठेकेदार को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कौन-सी पाइपलाइन किस क्षेत्र में बिछाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार बिजली आपूर्ति के समय में बदलाव, नलों पर वाल्व लगाने सहित कई प्रयोग किए गए, लेकिन इसके बावजूद गांव के अंतिम हिस्सों तक पानी नहीं पहुंच सका।

गंदे पानी से बीमारी फैलने का खतरा

कान्हलगांव नदी किनारे बनाई गई जलापूर्ति योजना के कुएं में इन दिनों गंदा और मटमैला पानी आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह पानी लोगों को पिलाया गया तो संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका है। इसी कारण इस स्त्रोत से भी फिलहाल जलापूर्ति नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था करने, जल जीवन मिशन की तकनीकी खामियों की जांच कराने तथा गोसीखुर्द बांध के जल प्रबंधन में सुधार करने की मांग की है।

Navbharat Live
navbharatlive.com